जैन धर्म विशेष (Jain Dharm Specials)

आइए जानें! जैन धर्म से जुड़ी कुछ जानकारियाँ, प्रसिद्ध भजन, जैन मंत्र, जैन मंदिर एवं जैन आरतियाँ तथा सम्वन्धित अन्य प्रेरक तथ्य। साथ ही साथ जानिए दशलक्षण पर्व के बारे में और महावीर जयंती उत्सव कहाँ और कैसे मनाये।
जैन व्रत एवं त्यौहार क्यों कब, कहाँ और कैसे?
महावीर जन्म कल्याणक - Mahavir Janma Kalyanak
दशलक्षण पर्व - Daslakshan Parva
श्रुत पंचमी - Shrut Panchami

आरती:
पंच परमेष्ठी आरती
आरती: ॐ जय महावीर प्रभु
आरती: श्री महावीर भगवान | जय सन्मति देवा
आरती: ॐ जय महावीर प्रभु
आरती: भगवान श्री शीतलनाथ जी

मंत्र:
णमोकार महामंत्र
भक्तामर स्तोत्र
सर्व भयानक रोग नाशक मंत्र

भजन:
मेरी भावना: जिसने राग-द्वेष कामादिक - जैन पाठ
तुम से लागी लगन.. पारस प्यारा
नाकोड़ा के भैरव तुमको आना होगा

भक्तमाल:
ज्ञानमती
आचार्य विद्यासागर

मंदिर:
प्रसिद्ध जैन मंदिर
श्री शौरीपुर बटेश्वर दिगंबर जैन सिद्ध क्षेत्र
लाल मंदिर, दिल्ली
प्राचीन दिगम्बर जैन मंदिर, बड़ागाँव
जैन बड़ा मंदिर, हस्तिनापुर
जैन मंदिर, फिरोजाबाद
वसुंधरा जैन मंदिर

ब्लॉग:
जैन ध्वज क्या है?
Jain Dharm Specials - Read in English
Lets know some related information, famous hymns and other inspiring facts related to Jainism..
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सावन शिवरात्रि 2026

आइए जानें! सावन शिवरात्रि से जुड़ी कुछ जानकारियाँ एवं सम्वन्धित कुछ प्रेरक तथ्य.. | बृहस्पतिवार, 30 जुलाई 2026 से शुक्रवार, 28 अगस्त 2026 तक

ISKCON एकादशी कैलेंडर 2026

यह एकादशी तिथियाँ केवल वैष्णव सम्प्रदाय इस्कॉन के अनुयायियों के लिए मान्य है | ISKCON एकादशी कैलेंडर 2026

अमेरिका में कैसे मनाई जाती है जन्माष्टमी?

अमेरिका श्रीकृष्ण के मंदिरों में जन्माष्टमी के त्यौहार पर भक्तों की भीड़ उमड़ती है और त्योहार का उत्सव भव्य रूप से मनाया जाता है। जन्माष्टमी उत्सव के दौरान संयुक्त राज्य अमेरिका में मंदिर द्वारा कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, पुजारियों और अन्य वक्ताओं द्वारा भगवान श्री कृष्ण के जीवन से सबक सुनाया जाते हैं।

संकष्टी चतुर्थी और विनायक चतुर्थी में क्या अंतर है?

शास्त्रों के अनुसार अमावस्या के बाद आने वाली शुक्ल पक्ष की चतुर्थी को विनायक चतुर्थी कहते हैं और कृष्ण पक्ष की चतुर्थी जो पूर्णिमा के बाद आती है उसे संकष्टी चतुर्थी कहते हैं।

मंदिर के शिखर दर्शन का महत्व

मंदिर में दर्शन के कई नियम हैं और उनका पालन करना जरूरी है। साथ ही यह भी माना जाता है कि यदि आप किसी कारण से मंदिर के अंदर प्रवेश नहीं कर सकते हैं, तो आपको बाहर से इसके शिखर के दर्शन अवश्य करने चाहिए।