Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

प्रणय गीत (Pranay Geet)


प्रणय गीत
श्रीमद भागवत के अन्तर्गत आने वाले गोपियों के पञ्च प्रेम गीत (वेणुगीत, युगल गीत, प्रणय गीत, गोपी गीत और भ्रमर गीत) इनमें से प्रणय गीत का वर्णन इस प्रकार है।
श्रीगोप्य ऊचुः ।
मैवं विभोऽर्हति भवान्गदितुं नृशंसं
सन्त्यज्य सर्वविषयांस्तव पादमूलम् ।
भक्ता भजस्व दुरवग्रह मा त्यजास्मान्
देवो यथादिपुरुषो भजते मुमुक्षून् ॥ १०.२९.३१॥

यत्पत्यपत्यसुहृदामनुवृत्तिरङ्ग
स्त्रीणां स्वधर्म इति धर्मविदा त्वयोक्तम् ।
अस्त्वेवमेतदुपदेशपदे त्वयीशे
प्रेष्ठो भवांस्तनुभृतां किल बन्धुरात्मा ॥ १०.२९.३२॥

कुर्वन्ति हि त्वयि रतिं कुशलाः स्व आत्मन्
नित्यप्रिये पतिसुतादिभिरार्तिदैः किम् ।
तन्नः प्रसीद परमेश्वर मा स्म छिन्द्या
आशां धृतां त्वयि चिरादरविन्दनेत्र ॥ १०.२९.३३॥

चित्तं सुखेन भवतापहृतं गृहेषु
यन्निर्विशत्युत करावपि गृह्यकृत्ये ।
पादौ पदं न चलतस्तव पादमूलाद्
यामः कथं व्रजमथो करवाम किं वा ॥ १०.२९.३४॥

सिञ्चाङ्ग नस्त्वदधरामृतपूरकेण
हासावलोककलगीतजहृच्छयाग्निम् ।
नो चेद्वयं विरहजाग्न्युपयुक्तदेहा
ध्यानेन याम पदयोः पदवीं सखे ते ॥ १०.२९.३५॥

यर्ह्यम्बुजाक्ष तव पादतलं रमाया
दत्तक्षणं क्वचिदरण्यजनप्रियस्य ।
अस्प्राक्ष्म तत्प्रभृति नान्यसमक्षमञ्जः
स्थातुंस्त्वयाभिरमिता बत पारयामः ॥ १०.२९.३६॥

श्रीर्यत्पदाम्बुजरजश्चकमे तुलस्या
लब्ध्वापि वक्षसि पदं किल भृत्यजुष्टम् ।
यस्याः स्ववीक्षण उतान्यसुरप्रयासस्
तद्वद्वयं च तव पादरजः प्रपन्नाः ॥ १०.२९.३७॥

तन्नः प्रसीद वृजिनार्दन तेऽन्घ्रिमूलं
प्राप्ता विसृज्य वसतीस्त्वदुपासनाशाः ।
त्वत्सुन्दरस्मितनिरीक्षणतीव्रकाम
तप्तात्मनां पुरुषभूषण देहि दास्यम् ॥ १०.२९.३८॥

वीक्ष्यालकावृतमुखं तव कुण्डलश्री
गण्डस्थलाधरसुधं हसितावलोकम् ।
दत्ताभयं च भुजदण्डयुगं विलोक्य
वक्षः श्रियैकरमणं च भवाम दास्यः ॥ १०.२९.३९॥

का स्त्र्यङ्ग ते कलपदायतवेणुगीत
सम्मोहितार्यचरितान्न चलेत्त्रिलोक्याम् ।
त्रैलोक्यसौभगमिदं च निरीक्ष्य रूपं
यद्गोद्विजद्रुममृगाः पुलकान्यबिभ्रन् ॥ १०.२९.४०॥

व्यक्तं भवान्व्रजभयार्तिहरोऽभिजातो
देवो यथादिपुरुषः सुरलोकगोप्ता ।
तन्नो निधेहि करपङ्कजमार्तबन्धो
तप्तस्तनेषु च शिरःसु च किङ्करीणाम् ॥ १०.२९.४१॥

॥ इति श्रीमद्भागवते महापुराणे पारमहंस्यां संहितायां दशमस्कन्धे
पूर्वार्धे भगवतो रासक्रीडावर्णनं नामैकोनत्रिंशोऽध्यायान्तर्गतं
प्रणयगीतं समाप्तम् ॥ १०.२९॥

Pranay Geet in English

Maivan Vibhorhati Bhavangaaditun Nrshansan, Santyajy Sarvavishayaanstav Paadamoolam।, Bhakta Bhajasv Doorgrah Ma Tyajasmaan, Devo Yathaadipurusho Bhajate Mumukshun ॥
यह भी जानें

Bhajan Pranay Geet BhajanYugal Geet BhajanPanch Prem Geet BhajanVenu Geet BhajanShri Krishna BhajanBrij BhajanBaal Krishna BhajanBhagwat BhajanJanmashtami BhajanLaddu Gopal BhajanRadhashtami BhajanIskcon BhajanGopi BhajanDr. Shyam Sundar Parashar Bhajan

अगर आपको यह भजन पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस भजन को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

नवीनतम भजन ›

कोई लाख करे चतुरायी: भजन

कोई लाख करे चतुरायी, करम का लेख मिटे ना रे भाई, जरा समझो इसकी सच्चाई रे...

भजन: अमृत बेला गया आलसी सो रहा बन आभागा !

बेला अमृत गया, आलसी सो रहा, बन आभागा, साथी सारे जगे, तू न जागा...

सजधज कर जिस दिन, मौत की शहजादी आएगी: भजन

सजधज कर जिस दिन, मौत की शहजादी आएगी, ना सोना काम आएगा..

भजन: कभी धूप कभी छाँव

सुख दुःख दोनों रहते जिस में, जीवन है वो गाओं, कभी धूप कभी छाँव

कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं: भजन

कभी प्यासे को पानी पिलाया नहीं, बाद अमृत पिलाने से क्या फायदा, कभी गिरते हुए को उठाया नही..

दुनिया बनाने वाले महिमा तेरी निराली - भजन

दुनिया बनाने वाले महिमा तेरी निराली। चन्दा बनाया शीतल सूरज में आग डाली। ऊँचे शिखर गिरी के आकाश चूमते हैं...

भजन: हर बात को भूलो मगर..

हर बात को भूलो मगर, माँ बाप मत भूलना, उपकार इनके लाखों है, इस बात को मत भूलना ॥ धरती पर देवो को पूजा..

Ganesh Aarti Bhajan - Ganesh Aarti Bhajan
Ram Bhajan - Ram Bhajan
Bhakti Bharat APP