भक्ति भारत को फेसबुक पर फॉलो करें!

भजन: सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को...


जैसे सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया,
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया। मेरे राम ॥
सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया...

भटका हुआ मेरा मन था कोई, मिल ना रहा था सहारा।
लहरों से लगी हुई नाव को जैसे मिल ना रहा हो किनारा। मिल ना रहा हो किनारा।
इस लडखडाती हुई नव को जो किसी ने किनारा दिखाया,
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया। मेरे राम ॥
सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया...

शीतल बने आग चन्दन के जैसी राघव कृपा हो जो तेरी।
उजयाली पूनम की हो जाये राते जो थी अमावस अँधेरी। जो थी अमावस अँधेरी।
युग युग से प्यासी मुरुभूमि ने जैसे सावन का संदेस पाया।
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया। मेरे राम ॥
सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया...

जिस राह की मंजिल तेरा मिलन हो उस पर कदम मैं बड़ाऊ।
फूलों मे खारों मे पतझड़ बहारो मे मैं ना कबी डगमगाऊ। मैं ना कबी डगमगाऊ।
पानी के प्यासे को तकदीर ने जैसे जी भर के अमृत पिलाया।
ऐसा ही सुख मेरे मन को मिला है, मैं जब से शरण तेरी आया। मेरे राम ॥
सूरज की गर्मी से जलते हुए तन को मिल जाये तरुवर की छाया...

ये भी जानें

BhajanArya Samaj BhajanVedik Bhajan


अगर आपको यह लेख पसंद आया, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

* यदि आपको इस पेज में सुधार की जरूरत महसूस हो रही है, तो कृपया अपने विचारों को हमें शेयर जरूर करें: यहाँ शेयर करें
** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर शेयर करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ शेयर करें

माँ सरस्वती! मुझको नवल उत्थान दो।

मुझको नवल उत्थान दो । माँ सरस्वती! वरदान दो ॥ माँ शारदे! हंसासिनी...

हे वीणा वादिनी सरस्वती, हंस वाहिनी..

हे वीणा वादिनी सरस्वती, हंस वाहिनी सरस्वती, विद्या दायिनी सरस्वती...

माँ शारदे कहाँ तू, वीणा बजा रही हैं!

माँ शारदे कहाँ तू, वीणा बजा रही हैं, किस मंजु ज्ञान से तू...

माँ! मुझे तेरी जरूरत है।

माँ ! मुझे तेरी जरूरत है। कब डालोगी, मेरे घर फेरा, तेरे बिन, जी नहीं लगता मेरा...

मेरा हाथ पकड़ ले रे, कान्हा..

मेरा हाथ पकड़ ले रे, कान्हा दिल मेरा घबराये, काले काले बादल...

जय जय शनि देव महाराज!

जय जय शनि देव महाराज, जन के संकट हरने वाले। तुम सूर्य पुत्र बलिधारी...

ज्योत से ज्योत जगाते चलो...

ज्योत से ज्योत जगाते चलो, प्रेम की गंगा बहाते चलो, राह में आये जो दीन दुखी, सब को गले से लगते चलो...

तेरे द्वार खड़ा भगवान, भक्त भर...

तेरे द्वार खड़ा भगवान, भक्त भर दे रे झोली। तेरा होगा बड़ा एहसान...

भजन: तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये!

साँची ज्योतो वाली माता, तेरी जय जय कार। तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये, मैं आया मैं आया शेरा वालिये।

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं।

अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं, राम नारायणं जानकी बल्लभम।

close this ads
^
top