Shri Ram Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

गौरीनन्दन गजानना: मंत्र (Gauri Nandana Gajanana)


गौरीनन्दन गजानना: मंत्र
गौरीनन्दन गजानना
गौरीनन्दन गजानना
गिरिजानन्दन निरञ्जना
गिरिजानन्दन निरञ्जना
पार्वतीनन्दन शुभानना
पार्वतीनन्दन शुभानना
शुभानना शुभानना
शुभानना शुभानना
पाहि प्रभो मां पाहि प्रसन्नाम्‌
पाहि प्रभो मां पाहि प्रसन्नाम्‌ ॥
गौरीनन्दन गजानना
गौरीनन्दन गजानना
गिरिजानन्दन निरञ्जना
गिरिजानन्दन निरञ्जना
पार्वतीनन्दन शुभानना
पार्वतीनन्दन शुभानना
शुभानना शुभानना
शुभानना शुभानना
पाहि प्रभो मां पाहि प्रसन्नाम्‌
पाहि प्रभो मां पाहि प्रसन्नाम्‌ ॥

Gauri Nandana Gajanana in English

Gauri Nandana Gajanana, Girija Nandana Niranjanaa, Parvati Nandana Shubhananaa...
यह भी जानें

Mantra Shri Ganesh MantraShri Vinayak MantraGanpati MantraGanpati Bappa MantraGaneshotsav MantraGajanan MantraGanesh Chaturthi MantraPancharatnam Mantra

अगर आपको यह मंत्र पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस मंत्र को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

मंत्र ›

श्री महालक्ष्मी अष्टक

नमस्तेस्तू महामाये श्रीपिठे सूरपुजिते । शंख चक्र गदा हस्ते महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥

महामाय़ा अष्टकम्

भद्रकाळी बिश्बमाता जगत्स्रोत कारिणी, शिबपत्नी पापहर्त्री सर्वभूत तारिणी, स्कन्दमाता शिवा शिवा सर्वसृष्टि धारिणी, नमः नमः महामाय़ा ! हिमाळय-नन्दिनी ॥ १

भगवती स्तोत्र

जय भगवति देवि नमो वरदे जय पापविनाशिनि बहुफलदे। जय शुम्भनिशुम्भकपालधरे प्रणमामि तु देवि नरार्तिहरे॥1॥

दुर्गा सप्तशती सिद्ध सम्पुट मंत्र

दुर्गा सप्तशती के 30 सिद्ध सम्पुट मंत्र, विपत्ति-नाश, भय-नाश, रोग-नाश, महामारी-नाश, लक्षणा पत्‍‌नी, पापनाश के लिये..

श्री दुर्गा मानस पूजा

उद्यच्चन्दनकुङ्कुमारुणपयोधाराभिराप्लावितां, नानानर्घ्यमणिप्रवालघटितां दत्तां गृहाणाम्बिके।, आमृष्टां सुरसुन्दरीभिरभितो हस्ताम्बुजैर्भक्तितो, मातः सुन्दरि भक्तकल्पलतिके श्रीपादुकामादरात्॥1॥

देवी अथर्वशीर्षम्

ॐ सर्वे वै देवा देवीमुपतस्थुः कासि त्वं महादेवीति॥1॥ साब्रवीत् - अहं ब्रह्मस्वरूपिणी। मत्तः प्रकृतिपुरुषात्मकं जगत्। शून्यं चाशून्यं च॥2॥

श्री लक्ष्मी सुक्तम् - ॐ हिरण्यवर्णां हरिणींसुवर्णरजतस्रजाम्

हरिः ॐ हिरण्यवर्णां हरिणीं सुवर्णरजतस्रजाम् । चन्द्रां हिरण्मयीं लक्ष्मीं जातवेदो म आवह ॥..

Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP