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श्री जगन्नाथ प्रातः स्मरण स्तोत्रम् (Jagannath Pratah Smaran Stotram)


श्री जगन्नाथ प्रातः स्मरण स्तोत्रम्
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नीलाम्बुद-श्यामल-कान्ति-कान्तं, नीलाम्बुधेर्नीलगिरौ बसन्तम् ।
लीलामयं नील-सरोज नेत्रं, देवं जगन्नाथमहं स्मरामि ॥१॥
संसार-धातारमनन्त-रूपं, वेदान्त-वेद्यं हृत-पाप-तापम् ।
प्रातश्च सायं च तमेकनाथं, बन्दे जगन्नाथमनाथनाथम् ॥२॥

दीनार्त्ति-नाशं करुणा-विलासं, सत्य-प्रकाशं हृदयैक-बासम् ।
श्रीशं परेशं जगदीशमीशं, बन्दे जगन्नाथमनाथ-नाथम् ॥३॥

हिरण्यपूर्वं कशिपुं निहन्तं, सत्ये धृतं येन नृसिंह-रूपम् ।
तमेवमाद्यं पुरुषाग्रगण्यं, श्रीमज्जगन्नाथमहं प्रपद्ये ॥४॥

त्रेतायुगे रावणमेव हन्तुं, रामस्वरूपं धृतवन्तमेकम् ।
धर्मावतारं भुवनैकवन्दयं, देवं जगन्नाथमहं स्मरामि ॥५॥

यो द्वापरे दैत्यविनाशनाय, दधौ सुरम्यं यदुनाथ-वेशम् ।
तं राधिका-नाथमनाथ-नाथं, देवं जगन्नाथमहं भजामि ॥६॥
Bhakti Bharat Lyrics

हन्तुं नराणामिह पाप-तापं, कलौ धृतं येन हरेः स्वरूपम् ।
प्रातश्च सायं च तमेकनाथं, देवं जगन्नाथमहं स्मरामि ॥७॥

हे देव-देव ! प्रभु विश्वनाथ ! श्रीमज्जगन्नाथ! जगद् वरेण्य ! ।
मोहान्धकारैव विनाश-सूर्य्यं, प्रातस्त्वदीयं पद-पद्ममीड़े ॥८॥
Lyrics: Acharya Harekrishna Shatpathi
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