Shri Ram Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

प्रेरणादायक महाराजा रणजीत सिंह की कहानियाँ (Preranadayak Maharaja Ranajeet Singh Ki Kahaniyan)


Add To Favorites Change Font Size
एक बार महाराजा रणजीत सिंह सेना के साथ जंगल मे पड़ाव डाला, भोजन पकाते समय पता चला कि नमक लाना भूल गए। तब किसी ने कहा कि निकट के गाँव मे से जाकर नमक ले आए।
जब सैनिक नमक लेकर आए तो महाराजा रणजीत सिंह जी ने पूछा: क्या नमक का मूल्य दे आए ?
सैनिको ने कहा: नमक का भी क्या मूल्य देना।
तभी महाराजा ने कहा: तत्काल नमक का मूल्य दे कर आओ। यदि राजा मुफ्त मे नमक लेगा तो उसके सिपाही तो पूरा गाँव ही लूट लेंगे।
एक बार महाराजा कहीं जा रहे थे, तभी उनके माथे पर पत्थर आकार लगा। उनके माथे पर से खून बहने लगा।
तभी सैनिक एक बुढ़िया को पकड़ लाए जिसने पत्थर फेंका था। बुढ़िया ने हाथ जो कर कहा कि वह अपने पोते के लिए फल तोड़ने के लिए पत्थर फेंका था जो गलती से उनके माथे पर लग गया।
महाराजा ने उस बुढ़िया को तत्काल कुछ धन दिया। सैनिको को बहुत आश्चर्य हुआ। तभी महाराजा ने कहा कि एक पेड़ पत्थर मारने पर फल देता है तो मैं क्या पेड़ से भी गया गुजारा हूँ?

सिख साम्राज्य महाराजा रणजीत सिंह (ਮਹਾਰਾਜਾ ਰਣਜੀਤ ਸਿੰਘ) के जीवन से जुड़े कुछ रोचक तथ्य -
जन्म: 13 नवंबर १७८०
मृत्यु: 27 जून १८३९
पिता: सरदार महां सिंघ
माता: राज कौर

शेर-ए पंजाब के नाम से प्रसिद्ध हैं। पहली आधुनिक भारतीय सेना सिख खालसा सेना गठित करने का श्रेय भी उन्हीं को जाता है।
उनके राज में कभी किसी अपराधी को मृत्युदण्ड नहीं दिया गया था।
महाराजा रणजीत सिंह को कोई औपचारिक शिक्षा नहीं मिली थी, वह अनपढ़ थे।
किसी राज्य को जीत कर भी वह अपने शत्रु को बदले में कुछ ना कुछ जागीर दे दिया करते थे ताकि वह अपना जीवन निर्वाह कर सके।

उन्होंने अमृतसर के हरिमन्दिर साहिब गुरूद्वारे में सोना मढ़वाया, तभी से उसे स्वर्ण मंदिर कहा जाने लगा।
महाराजा रणजीत सिंह न गौ मांस खाते थे ना ही अपने दरबारियों को इसकी आज्ञा देते थे।
महाराजा हिन्दू मंदिरों को मनों सोना भेंट करने के लिए वे प्रसिद्ध थे।

कीमती हीरा कोहिनूर महाराजा रणजीत सिंह के खजाने की रौनक था।
उनकी समाधि लाहौर में बनवाई गई, जो आज भी वहां कायम है।
यह भी जानें

Prerak-kahani Maharaja Ranajeet Singh Prerak-kahaniForest Prerak-kahaniJangal Prerak-kahaniVillage Prerak-kahaniSainik Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

Latest Prerak-kahani ›

फर्क नजरिये का..: प्रेरक कहानी

मालूम नहीं। यहां पत्थर तोड़ते - तोड़ते जान निकल रही है और इनको यह चिंता है कि यहां क्या बनेगा।

अन्तत: अन्तिम निर्णय ईश्वर ही करता है - प्रेरक कहानी

जंगल में एक गर्भवती हिरनी बच्चे को जन्म देने को थी। वो एकांत जगह की तलाश में घुम रही थी, कि उसे नदी किनारे ऊँची और घनी घास दिखी।...

भक्त बडे विचित्र, उनके प्रभु उनसे भी विचित्र - सत्य कथा

एक भक्त थे कुम्भनदासजी जो गोवर्धन की तलहटी में रहते थे। एक बार की बात है कि भक्त कुम्भनदास जी भगवान श्रीनाथजी के पास गये और उन्हें जाकर देखा कि श्रीनाथजी अपना मुँह लटकाये बैठे हैं..

क्या ईश्वर में सम्पूर्ण विश्वास है - प्रेरक कहानी

एक बार, दो बहुमंजिली इमारतों के बीच, बंधी हुई एक तार पर लंबा सा बाँस पकड़े, एक कलाकार चल रहा था। उसने अपने कन्धे पर अपना बेटा बैठा रखा था। सैंकड़ों लोग दिल साधे देख रहे थे।

प्रार्थना के बाद भी भगवान नहीं सुन रहे? - प्रेरक कहानी

प्रार्थना छोड़ दोगे तो कहीं के नहीं रहोगे? प्रार्थना के बाद भी भगवान आपकी नहीं सुन रहे हैं? एक सेठ के घर के बाहर एक साधू महाराज खड़े होकर प्रार्थना कर रहे थे और बदले में खाने को रोटी मांग रहे थे।

साधु संगत से चोर ने चोरी छोड़ी - प्रेरक कहानी

एक डाकू था, जो लूट पाट करता था। एक बार एक गांव से धन लूटकर वो भाग रहा था कि घोड़े पर से गिर कर घायल हो गया। उसने देखा पास में ही एक साघू की कुटिया है

समाधान-वृक्ष - प्रेरक कहानी

शाम को घर में प्रवेश करते ही बच्चों को वे दोनों नाकारा होने के लिए डाँटते थे पति और बच्चों की अलग-अलग फरमाइशें पूरी करते-करते बदहवास और चिड़चिड़ी हो जाती है।

Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP