Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

सिद्धियों का उचित प्रयोग ही करें - प्रेरक कहानी (Siddhiyon Ka Uchit Prayog Hi Karen)


Add To Favorites Change Font Size
चार विद्वान ब्राह्मण मित्र थे। एक दिन चारों ने संपूर्ण देश का भ्रमण कर हर प्रकार का ज्ञान अर्जित करने का निश्चय किया। चारों ब्राह्मणों ने चार दिशाएं पकड़ीं और अलग-अलग स्थानों पर रहकर अनेक प्रकार की विद्याएं सीखीं।
पांच वर्ष बाद चारों अपने गृहनगर लौटे और एक जंगल में मिलने की बात तय की। चूंकि चारों परस्पर एक-दूसरे को अपनी गूढ़ विद्याओं व सिद्धियों को बताना चाहते थे, अत: इसके लिए जंगल से उपयुक्त अन्य कोई स्थान नहीं हो सकता था।

जब चारों जंगल में एक स्थान पर एकत्रित हुए तो वहां उन्हें शेर के शरीर की एक हड्डी पड़ी हुई मिली।
एक ब्राह्मण ने कहा: मैं अपनी विद्या से इस एक हड्डी से शेर का पूरा अस्थि पंजर बना सकता हूँ। उसने ऐसा कर भी दिखाया।

तब दूसरे ब्राह्मण ने कहा: मैं इसे त्वचा, मांस और रक्त प्रदान कर सकता हूँ। फिर उसने यह कर दिया। अब उन लोगों के समक्ष एक शेर पड़ा था, जो प्राणविहीन था।

अब तीसरा ब्राह्मण बोला: मैं इसमें अपनी सिद्धि के चमत्कार से प्राण डाल सकता हूँ।
चौथे ब्राह्मण ने उसे यह कहते हुए रोका: यह मूर्खता होगी। हमें तुम पर विश्वास है, किंतु यह करके न दिखाओ।

किंतु तीसरे ब्राह्मण का तर्क था कि ऐसी सिद्धि का क्या लाभ जिसे क्रियान्वित न किया जाए। उसका हठ देखकर चौथा ब्राह्मण तत्काल पास के पेड़ पर चढ़कर बैठ गया। तीसरे ब्राह्मण के मंत्र पढ़ते ही शेर जीवित हो गया। प्राणों के संचार से शेर को आहार की आवश्यकता महसूस हुई और उसने सामने मौजूद तीनों ब्राह्मणों को मारकर खा लिया। चौथे ब्राह्मण ने समझदारी से अपने प्राण बचा लिए।

किसी भी कार्य को करने से पहले उसके परिणामों पर भली-भांति विचार कर लेना चाहिए, अन्यथा विपरीत स्थिति का सामना करना पड़ सकता है।
यह भी जानें

Prerak-kahani Sher Prerak-kahaniLoin Prerak-kahaniBrihaman Prerak-kahaniChar Dost Prerak-kahaniJangal Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें।

Latest Prerak-kahani ›

राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न भाइयों का प्यार

राम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न चारों भाइयों के बचपन का एक प्रसंग है! जब ये लोग खेलते थे तो लक्ष्मण राम की तरफ उनके पीछे होता था..

श्री राम नाम जाप महिमा

अगर तुम तीन बार राम नाम का जाप करते हो तो यह सम्पूर्ण विष्णु सहस्त्रनाम या १००० बार ईश्वर के नाम का जाप करने के बराबर है।

श्री तुलसी जी का चमत्कार - प्रेरक कहानी

तुलसी माला पहनने से व्यक्ति की पाचन शक्ति, तेज बुखार, दिमाग की बीमारियों एवं वायु संबंधित अनेक रोगों में लाभ मिलता है। संक्रामक बीमारी और अकाल मौत भी नहीं होती, ऐसी धार्मिक मान्यता है।

निर्दोष को कैसी सजा - प्रेरक कहानी

बहुत समय पहले हरिशंकर नाम का एक राजा था। उसके तीन पुत्र थे और अपने उन तीनों पुत्रों में से वह किसी एक पुत्र को राजगद्दी सौंपना चाहता था।

भगवान चढ़ाया गया भोग कैसे खाते हैं? - प्रेरक कहानी

क्या भगवान हमारे द्वारा चढ़ाया गया भोग खाते हैं? यदि खाते हैं, तो वह वस्तु समाप्त क्यों नहीं हो जाती?..

सचमुच सब कुछ तुम्हारे हाथ में ही है

एक आदमी रेगिस्तान से गुजरते वक़्त बुदबुदा रहा था.. तभी एक चमत्कार होता है, नजर झुकाते ही उसे सामने एक कुआँ नजर आता है।

भगवान की कृपा से ही सब मिलता है - प्रेरक कहानी

एक राजा था, वह जब पूजा के लिए मंदिर जाता, तो 2 भिखारी उसके दाएं और बाएं बैठा करते।..

Shri Krishna Bhajan - Shri Krishna Bhajan
Ram Bhajan - Ram Bhajan
Bhakti Bharat APP