होलिका दहन | चैत्र नवरात्रि | आज का भजन! | भक्ति भारत को फेसबुक पर फॉलो करें!

प्रार्थना: हम को मन की शक्ति देना


हम को मन की शक्ति देना, मन विजय करें।
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें।

भेदभाव अपने दिल से, साफ कर सकें।
दोस्तों से भूल हो तो, माफ कर सकें।
झूठ से बचे रहें, सच का दम भरें।
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें।
॥ हम को मन की शक्ति देना...॥

मुश्किलें पड़े तो हम पे, इतना कर्म कर।
साथ दे तो धर्म का, चलें तो धर्म पर।
खुद पे हौसला रहे, बदी से ना डरें।
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें।

हम को मन की शक्ति देना, मन विजय करें।
दूसरों की जय से पहले, खुद को जय करें।

Read Also:
» दया कर दान विद्या का हमे परमात्मा देना! | वह शक्ति हमें दो दया निधे! | हे जग त्राता विश्व विधाता! | ऐ मालिक तेरे बंदे हम! | या कुन्देन्दुतुषारहारधवला | | भजन: इतनी शक्ति हमें देना दाता
» भोजन मन्त्र: ॐ सह नाववतु। | प्रातः स्मरण - दैनिक उपासना | शांति पाठ | विद्यां ददाति विनयं! | येषां न विद्या न तपो न दानं

VandanaSchool VandanaCollage Vandana


अगर आपको यह लेख पसंद आया, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

* यदि आपको इस पेज में सुधार की जरूरत महसूस हो रही है, तो कृपया अपने विचारों को हमें शेयर जरूर करें: यहाँ शेयर करें
** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर शेयर करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ शेयर करें

आरती: माँ सरस्वती वंदना

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता, या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।...

प्रार्थना: दया कर दान विद्या का!

देश के एक हजार से ज्यादा केंद्रीय विद्यालयों, जवाहर नवोदय विद्यालय में बच्चों द्वारा सुबह...

संकट मोचन हनुमानाष्टक

लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर। वज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर ॥

प्रार्थना: वह शक्ति हमें दो दया निधे!

उत्तर प्रदेश के साथ अधिकतर उत्तर भारत के सरकारी स्कूल में 1961 से ही गाई जाने वाली सबसे प्रसिद्ध प्रार्थना। वह शक्ति हमें दो दया निधे...

ब्रह्मन्! स्वराष्ट्र में हों...

ब्रह्मन्! स्वराष्ट्र में हों, द्विज ब्रह्म तेजधारी। क्षत्रिय महारथी हों, अरिदल विनाशकारी॥...

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे!

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे, त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्...

श्री राम स्तुति: श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन!

श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन हरण भवभय दारुणं। नव कंज लोचन कंज मुख...

जय राम रमा रमनं समनं।

जय राम राम रमनं समनं। भव ताप भयाकुल पाहि जनम॥ अवधेस सुरेस रमेस बिभो।...

हे जग स्वामी, अंतर्यामी, तेरे सन्मुख आता हूँ!

हे जग स्वामी, अंतर्यामी, तेरे सन्मुख आता हूँ। सन्मुख आता, मैं शरमाता...

श्री हनुमान बाहुक

असहनीय कष्टों से हताश होकर अन्त में उसकी निवृत्ति के लिये गोस्वामी तुलसीदास जी ने हनुमानजी की वन्दना आरम्भ की जो कि ४४ पद्यों के हनुमानबाहुक प्रसिद्ध स्तोत्र लिखा।

close this ads
^
top