Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

एक हरि को छोड़ किसी की चलती नहीं है मनमानी - भजन (Ek Hari Ko Chorh Kisi Ki Chalti Nahi Hai Manmani)


एक हरि को छोड़ किसी की चलती नहीं है मनमानी - भजन
Add To Favorites Change Font Size
एक हरि को छोड़ किसी की,
चलती नहीं है मनमानी,
चलती नही है मनमानी......
लंकापति रावण योद्धा ने,
सीता जी का हरण किया,
इक लख पूत सवालख नाती,
खोकर कुल का नाश किया,
धान भरी वो सोने की लंका,
हो गई पल मे कूल्धानि,
एक हरि को छोड़ किसी की,
चलती नही है मनमानी......

मथुरा के उस कंस राजा ने,
बहन देवकी को त्रास दिया,
सारे पुत्र मार दीये उसने,
तब प्रभु ने अवतार लिया,
मार गिराया उस पापी को,
था मथुरा मे बलशाली,
एक हरि को छोड़ किसी की,
चलती नही है मनमानी.....

भस्मासुर ने करी तपस्या,
शंकर से वरदान लिया,
शंकर जी ने खुश होकर उसे,
शक्ति का वरदान दिया,
भस्म चला करने शंकर को,
शंकर भागे हरीदानी,
एक हरी को छोड़ किसी की,
चलती नही है मनमानी.......

उसे मारने श्री हरि ने,
सुंदरी का रुप लिया,
जेसा जेसा नाचे मोहन,
वेसा वेसा नाच किया,
अपने हाथ को सर पर रखकर,
भस्म हुआ वो अभिमानी,
एक हरी को छोड़ किसी की,
चलती नही है मनमानी......

सुनो सुनो ए दुनिया वालो,
पल भर मे मीट जाओगे,
गुरु चरणों मे जल्दी जाओ,
हरि चरणों को पाओगे,
भजनानद कहे हरी भजलो,
दो दिन की है ज़िन्दगानी,
एक हरि को छोड़ किसी की,
चलती नही है मनमानी.......
यह भी जानें

Bhajan Shri Hari BhajanShri Ram BhajanShri Raghuvar BhajanRam Navmi BhajanSita Navami BhajanJanaki Jayanti BhajanSundarkand BhajanRamayan Path BhajanVijayadashami BhajanMata Sita BhajanRam Sita Vivah BhajanShri Vishnu Bhajan

अगर आपको यह भजन पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस भजन को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

नवीनतम भजन ›

एक हरि को छोड़ किसी की चलती नहीं है मनमानी - भजन

एक हरि को छोड़ किसी की, चलती नहीं है मनमानी, चलती नही है मनमानी......

हे कृष्ण गोपाल हरि हे दीन दयाल हरि: भजन

हे कृष्ण गोपाल हरि, हे दीन दयाल हरि, हे कृष्ण गोपाल हरी, हे दीन दयाल हरि, हे कृष्ण गोपाल हरी, हे दीन दयाल हरि ॥

हरी दर्शन की प्यासी अखियाँ - भजन

हरी दर्शन की प्यासी अखियाँ, अखियाँ हरी दर्शन की प्यासी ॥ देखियो चाहत कमल नैन को..

तेरे कितने है मुझपे एहसान, हर घडी़ मैं जपूँ तेरा नाम: भजन

तेरे कितने है मुझपे एहसान, हर घडी़ मैं जपूँ तेरा नाम, श्याम श्याम श्याम बाबा, श्याम श्याम श्याम ॥

मोहे मुरली बना लेना: भजन

कान्हा मेरी सांसो पे, नाम अपना लिखा लेना, फिर जो जन्म लूँ मैं, मोहे मुरली बना लेना, कान्हा मेरी सांसो पे, नाम अपना लिखा लेना ॥


भजन: सांवरे को दिल में बसा के तो देखो

सांवरे को दिल में बसा के तो देखो, दुनिया से मन को हटा के देखो...

जिन्हां दे शंकर हों सहाई - भजन

जेहड़े, शिव मंदिर विच आवंदे, शंकर, जी दा नाम ध्यावंदे ॥

Om Jai Jagdish Hare Aarti - Om Jai Jagdish Hare Aarti
Ram Bhajan - Ram Bhajan
Bhakti Bharat APP