Shri Ram Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

खाटू श्याम फाल्गुन मेला 2023 (Khatu Shyam Falgun Mela 2023)

खाटू श्याम फाल्गुन मेला 2023
फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष में करीब 7 दिन तक चलने वाला श्री खाटूश्यामजी फाल्गुन मेला राजस्थान के सबसे बड़े मेलों में एक है। हर वर्ष मेले में देश-विदेशों से लाखों श्रद्धालु श्री श्याम के दर्शन करने आते हैं। इस अवसर पर संपूर्ण खाटू नगरी बाबा श्याम के रंग में रंगी हुई होती है।
खाटू श्याम जी फाल्गुन मेला 2022 तिथियाँ:
मंगलवार, 08 मार्च 2022 - षष्ठी
बुधवार, 09 मार्च 2022 - सप्तमी
गुरूवार, 10 मार्च 2022 - सप्तमी
शुक्रवार, 11 मार्च 2022 - अष्टमी
शनिवार, 12 मार्च 2022 - नवमी
रविवार, 13 मार्च 2022 - दशमी
सोमवार, 14 मार्च 2022 - एकादशी
मंगलवार, 15 मार्च 2022 - द्वादशी

कोरोना महामारी को देखते हुए खाटू मेला 2022 में भी कुछ पाबंदियां लगाई गई हैं:
● मेले के दौरान बाबा श्याम का दरबार 24 घंटे खुला रहेगा।
● इस बार भी भजन संध्या, डीजे व भंडारों पर रोक रहेगी। स्वयंसेवी संस्थाएं सिर्फ पेय पदार्थ वितरित कर सकेंगी।
● इस बार बाबा श्याम की रथ यात्रा संक्षिप्त रहेगी। इसमें लोगों की संख्या भी सीमित रखने के निर्देश दिए हैं।
● खाटू मेले में पार्किंग व्यवस्था निशुल्क रहेगी।
● दूध की व्यवस्था के लिए डेयरी के 15 बूथ लगाए जाएंगे।
● इस बार मेले में भाग लेने वालो श्याम भक्तों के लिए कोरोना वक्सिन की दोनों डोज अनिवार्य की गयी है साथ ही दोनों डोज का प्रमाण पत्र लेकर जाना होगा, खाटूश्यामजी फाल्गुन लक्खी मेले में कोरोना महामारी की गाइडलाइन की पालना कराना जरूरी है ।
● राजस्थान से बहार से आने वालो के लिए 72 घंटे तक की आरटीपीसीआर रिपोर्ट जरूरी होगी। खाटूश्यामजी मेले में टीका, आरटीपीसीआर रिपोर्ट की जांच खाटू नगरी में प्रवेश करने से पहले ही की जाएगी इस बात का आपको विशेष ध्यान रखना है ।

मेले के दौरान असुविधा से बचने के लिए, मंदिर की वेबसाइट पर आवश्यक सूचनाएँ अवश्य देखें: https://www.khatooshyamji.com/

Khatu Shyam Falgun Mela 2023 in English

Shri Khatu Shyam Ji Falgun Mela is one of the biggest Mela (Fair) in Rajasthan, which lasts for about 8 days in the Shukla Paksha of Phalgun month.
यह भी जानें

Blogs Falgun BlogsFalgun Mela BlogsFalgun Mela 2023 BlogsShri Shyam BlogsKhatushyam BlogsKhatu Nagari BlogsFalgun Mela Dates BlogsFalgun Mela Schedule Blogs

अगर आपको यह ब्लॉग पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस ब्लॉग को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

ब्लॉग ›

चरण स्पर्श नियम

भारतीय संस्कृति में बड़ों के पैर छूना एक पारंपरिक भाव है जो सम्मान, विनम्रता और आशीर्वाद दर्शाता है। भक्तिभारती यहाँ कुछ बुनियादी "नियम" बताती है।

मंडला पूजा क्या है?

मंडला पूजा, शास्त्रों में निर्धारित सभी तपस्या और दिनचर्या के साथ 41 दिनों की लंबी अवधि पूरे कठोर रीती रिवाज़ के साथ पालन किया जाने वाला अनुष्ठान है।

साध्वी का क्या अर्थ है?

साध्वी एक संस्कृत शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ है "गुणी महिला" और उन महिलाओं को संदर्भित करता है जिन्होंने अपनी संसार का मोह को त्याग दिया है और आध्यात्मिक जीवन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए समाज से अलग रहना चुना है। उनका जीवन भगवान के प्रति समर्पण और समाज के लिए सेवा का एक उल्लेखनीय संयोजन है। साध्वी मानते ​​है कि “मानवता की सेवा भगवान की सेवा है” और अपने जीवन भगवान के प्रति समर्पण करलेते हैं।

शकुनि से जुड़ी कुछ जानकारियाँ..

शकुनि के पिता, माता, पत्नी, बेटे का क्या नाम था? युद्ध में सहदेव ने वीरतापूर्वक युद्ध करते हुए शकुनि और उलूक को घायल कर दिया और देखते ही देखते उलूक का वध दिया।

भारतीय ऋतुएँ

सभी ऋतुओं की बात करें तो एक वर्ष में कुल छह ऋतुएँ होती हैं। इस मामले में, प्रत्येक मौसम की अवधि दो महीने है।

हिंदू परंपरा में गोत्र का महत्व

गोत्र हिंदू परंपरा की एक अवधारणा है जो किसी व्यक्ति के पैतृक वंश या कुल को संदर्भित करती है, जिसे आमतौर पर पुरुष वंश (पिता → दादा → परदादा, इत्यादि) के माध्यम से खोजा जाता है।

पूजा और आरती में अंतर

हिन्दू धर्म में पूजा पाठ का विशेष महत्व है। पूजा के माध्यम से लोग भगवान के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करते हैं और परिणामस्वरूप उनकी मनोकामना पूरी होती है। लोग दिन के अनुसार प्रत्येक भगवान की पूजा करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पूजा भगवान के प्रति समर्पण दिखाने के लिए की जाती है और इसके बाद आरती की रस्म होती है।

Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP