Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

मधुपर्क विधि क्या है? (What is Madhupark Vidhi?)

"मधुपर्क" एक वह पदार्थ/पेय है की जो विवाह में वर जब वधू के द्वारपर आता है, तो उसे वधू पक्ष की ओरसे बडे आदरसे प्राशीत किया जाता है | अभी भी यह परंपरा केवल समाजमें अखंडीत है | मधुपर्क में दही और शहद मिलाते है यदी शहद उपलब्ध न होने पर घी का प्रयोग होता है !
विवाह अत्यन्त पवित्र और महत्वपूर्ण संस्कार है। गृहस्थाश्रम में प्रवेश का नाम विवाह है। हमारे शास्त्रों के अनुसार यह एक अत्यन्त पवित्र और महत्वपूर्ण संस्कार है। इसका क्रमानुसार विवरण इस प्रकार है:द्वारपूजा: विवाह के दिन जब वर वधुगृह में उपस्थित होता है उस समय द्वार पर कन्या का पिता या बड़ा भाई अर्घ्य, पाद्य, आचमन, मधुपर्क आदि के द्वारा वर का स्वागत या पूजन करते हैं। कहीं-कहीं कन्या स्वयं द्वार पर आकर मधुर वचनों से वर का सत्कार करती हुई, उसके गले में वरमाला पहनाती है। तत्पश्चात वर भी वधु को माला पहनाकर उसका परिणय स्वीकार करता है।

कन्या पक्ष से विवाह मंडप के मध्य वर का विधिपूर्वक मधुपर्क (दही, शहद, घी) के द्वारा विशेष सम्मान किया जाता है। मधुपर्क: मधुपर्क में दही, शहद और घी का तीन, दो, एक के अनुपात में मिश्रण होता है, जिसे कन्या पिता वर को खाने के लिए देता है। वस्तुत: यह एक रसायन (महौषधि) है, जो वात, कफ, पित्तशामक, स्वास्थ्यवर्धक एवं मधुर है। इसके द्वारा गृहिणी को यह शिक्षा दी गई है कि उसे पाकशाला में मधुर, बलवर्धक, रक्तवर्धक एवं पथ्यकारी आहार बनाना चाहिए तथा वर को यह संकेत भी दिया जाता है कि आपको इसी तरह हितकारी भोजन तथा सद्व्यवहार जीवन पर्यन्त मिलता रहेगा।

वर मधु पर्क को हाथ में लेकर यह वाक्य बोलता है: ''ओम मित्रस्य त्वा चक्षुषा समीक्षे।।'' अर्थात हे खाद्य, मैं तुझे मित्र की दृष्टि से देखता हूं। इस प्रकार मित्रता, प्रसन्नता की भावना के साथ ''भूतेभ्यस्त्वा परिगृहणामि'' मैं तुझे केवल अपने लिए नहीं, अपितु प्राणिमात्र के लिए ग्रहण करता हूं। ऐसा कहता हुआ मधुपर्क को अन्य तीन भागों में विभक्त कर स्वीकार करता है।

इससे 'तेन त्यक्तेन मुंजीथा:' संसार के पदार्थों को त्यागपूर्वक उपभोग करना चाहिए, इस आदर्श को चरितार्थ करता है। गोदान: मधुपर्क प्राशन के पश्चात गोदान की विधि होती है। गौ भारतीय संस्कृति की प्रतीक है। गौ नहीं तो घर नहीं। यह गौ इसलिए दी जाती है कि इसके दुग्धादि पदार्थों का सेवन कर घर के सभी सदस्य निरोग और स्वस्थ रह सकें। विवाह के अवसर पर गोदान का विधान कर ऋषि मुनियों ने गोरक्षा का अमोघ उपाय ढूंढ़ निकाला था।

What is Madhupark Vidhi? in English

"Madhupark" is a substance/drink which is welcomed with great respect by the bride's side when the groom arrives at the bride's door during the marriage.
यह भी जानें

Blogs Madhupark Vidhi BlogsHindu Rituals BlogsHindu Marriage BlogsPooja BlogsVrat BlogsBeliefs BlogsPooja Vidhi BlogsKatha BlogsLakshmi Ji Blogs

अगर आपको यह ब्लॉग पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस ब्लॉग को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

ब्लॉग ›

भगवान श्री विष्णु के दस अवतार

भगवान विष्‍णु ने धर्म की रक्षा हेतु हर काल में अवतार लिया। भगवान श्री विष्णु के दस अवतार यानी दशावतार की प्रामाणिक कथाएं।

अभय मुद्रा का आध्यात्मिक महत्व

अभय मुद्रा हिंदू और बौद्ध धर्म में उपयोग की जाने वाली एक मुद्रा (हाथ का इशारा) है।

ग्रीष्म संक्रांति | जून संक्रांति

ग्रीष्म संक्रांति तब होती है जब पृथ्वी का सूर्य की ओर झुकाव अधिकतम होता है। इसलिए, ग्रीष्म संक्रांति के दिन, सूर्य दोपहर की स्थिति के साथ अपनी उच्चतम ऊंचाई पर दिखाई देता है जो ग्रीष्म संक्रांति से पहले और बाद में कई दिनों तक बहुत कम बदलता है। 21 जून उत्तरी गोलार्ध में सबसे लंबा दिन होता है, तकनीकी रूप से इस दिन को ग्रीष्म संक्रांति कहा जाता है। ग्रीष्म संक्रांति के दौरान उत्तरी गोलार्ध में एक विशिष्ट क्षेत्र द्वारा प्राप्त प्रकाश की मात्रा उस स्थान के अक्षांशीय स्थान पर निर्भर करती है।

अभिजीत मुहूर्त

अभिजीत मुहूर्त दोपहर के समय का शुभ मुहूर्त है जो लगभग 48 मिनट तक रहता है। अभिजीत मुहूर्त असंख्य दोषों को नष्ट करने में सक्षम है और सभी प्रकार के शुभ कार्यों को शुरू करने के लिए इसे सर्वश्रेष्ठ मुहूर्तों में से एक माना जाता है।

मधुपर्क विधि क्या है?

"मधुपर्क" एक वह पदार्थ/पेय है की जो विवाह में वर जब वधू के द्वारपर आता है, तो उसे वधू पक्ष की ओरसे बडे आदरसे प्राशीत किया जाता है |

ब्रज के भावनात्मक 12 ज्योतिर्लिंग

ब्रजेश्र्वर महादेव: (बरसाना)श्री राधा रानी के पिता भृषभानु जी भानोखर सरोवर मे स्नान करके नित्य ब्रजेश्वर महादेव की पूजा करते थे।

कपूर जलाने के क्या फायदे हैं?

भारतीय रीति-रिवाजों में कपूर का एक विशेष स्थान है और पूजा के लिए प्रयोग किया जाता है। कपूर का उपयोग आरती और पूजा हवन के लिए भी किया जाता है। हिंदू धर्म में कपूर के इस्तेमाल से देवी-देवताओं को प्रसन्न करने की बात कही गई है।

Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP