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कोरोना: लॉकडाउन, जनता कर्फ्यू, क्वारंटाइन के समय क्या पढ़ें? (Corona: Lockdown, Janta Curfew, Quarantine and Isolation Main Kiya Padhe)

कोरोना: लॉकडाउन, जनता कर्फ्यू, क्वारंटाइन के समय क्या पढ़ें?
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स्वयं को अंदर से इतना मजबूत करें, कि आपके अंदर की महाकाली रक्तबीज जैसे वाइरस का संहार कर सकें।
कोरोना वायरल की विश्वव्यापी महामारी के चलते हमारे देश भारत मे बहुत लोग COVID 19 से संक्रमित पाए गये हैं, इस दौरान लोगों को लॉकडाउन, जनता कर्फ्यू, क्वारंटाइन, पृथक, आइसोलेट जैसी परिस्थितियों के साथ रहना पड़ रहा है।

इस स्थिति में आप कैसे स्वयं को सकारात्मक ऊर्जा के साथ व्यस्त रखें, इसके समाधान के रूप मे आप भक्ति-भारत वेबसाइट पर.. व्रत कथाएँ, भजन, प्रेरक कथाएँ, आरतियाँ, मंत्र, चालीसा, मंदिरों के इतिहास, धार्मिक ब्लॉग्स एवं त्यौहारों के बारे में विस्तार से अपने ज्ञान को पोषित कर सकते हैं।

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दैनिक हवन-यज्ञ विधि
गायत्री मंत्र
शांति पाठ
ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः
अच्चुतम केशवं कृष्ण दामोदरं

इस महामारी से लड़ने के लिए सफाई एवं धैर्य रखें, घर पर ही रहें, पौष्टिक आहार ग्रहण करें तथा सरकार के दिशा निर्देशों का पालन करें।
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मंडला पूजा क्या है?

मंडला पूजा, शास्त्रों में निर्धारित सभी तपस्या और दिनचर्या के साथ 41 दिनों की लंबी अवधि पूरे कठोर रीती रिवाज़ के साथ पालन किया जाने वाला अनुष्ठान है।

साध्वी का क्या अर्थ है?

साध्वी एक संस्कृत शब्द है जिसका शाब्दिक अर्थ है "गुणी महिला" और उन महिलाओं को संदर्भित करता है जिन्होंने अपनी संसार का मोह को त्याग दिया है और आध्यात्मिक जीवन पर ध्यान केंद्रित करने के लिए समाज से अलग रहना चुना है। उनका जीवन भगवान के प्रति समर्पण और समाज के लिए सेवा का एक उल्लेखनीय संयोजन है। साध्वी मानते ​​है कि “मानवता की सेवा भगवान की सेवा है” और अपने जीवन भगवान के प्रति समर्पण करलेते हैं।

शकुनि से जुड़ी कुछ जानकारियाँ..

शकुनि के पिता, माता, पत्नी, बेटे का क्या नाम था? युद्ध में सहदेव ने वीरतापूर्वक युद्ध करते हुए शकुनि और उलूक को घायल कर दिया और देखते ही देखते उलूक का वध दिया।

भारतीय ऋतुएँ

सभी ऋतुओं की बात करें तो एक वर्ष में कुल छह ऋतुएँ होती हैं। इस मामले में, प्रत्येक मौसम की अवधि दो महीने है।

हिंदू परंपरा में गोत्र का महत्व

गोत्र हिंदू परंपरा की एक अवधारणा है जो किसी व्यक्ति के पैतृक वंश या कुल को संदर्भित करती है, जिसे आमतौर पर पुरुष वंश (पिता → दादा → परदादा, इत्यादि) के माध्यम से खोजा जाता है।

पूजा और आरती में अंतर

हिन्दू धर्म में पूजा पाठ का विशेष महत्व है। पूजा के माध्यम से लोग भगवान के प्रति सम्मान और आभार व्यक्त करते हैं और परिणामस्वरूप उनकी मनोकामना पूरी होती है। लोग दिन के अनुसार प्रत्येक भगवान की पूजा करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। पूजा भगवान के प्रति समर्पण दिखाने के लिए की जाती है और इसके बाद आरती की रस्म होती है।

महाकुंभ में प्रसिद्ध अखाड़े

महाकुंभ की शान हैं अखाड़े। महाकुंभ में अखाड़े केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। तपस्वियों, संतों और आध्यात्मिक अभ्यासकर्ताओं से बने ये समूह भारत की आध्यात्मिक परंपराओं में गहराई से निहित हैं।

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