जय देवी जय देवी तुळजा अंबाई ।
चंड मुंड वधुनिया महिषासुर वधुनिया ।
ठेविलासे तुझे पायी ॥ धृ ॥
वाघावर स्वार झाली, हाती सोन्याचे गोट ।
बाजूबंद दंडामधी, शोभती गोमटे ।
जय देवी जय देवी तुळजा अंबाई ॥ १ ॥
आई तुझे दरबारी, लाख खंडीभर तेल ।
जैसे कोदीमध्ये (कुंडामध्ये), प्रकाश हा फाकला।
जय देवी जय देवी तुळजा अंबाई ॥ २ ॥
भक्तिभारत लिरिक्स
कवड्याची गळी माळ, करते भक्तांचा संभाळ ।
तुळजापूरची माता भवानी, आरती करतो नेमाने ।
जय देवी जय देवी तुळजा अंबाई ॥ ३ ॥
जय देवी जय देवी तुळजा भवानी ।
चंड मुंड वधुनिया महिषासुर वधुनिया ।
ठेविलासे तुझे पायी ॥
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