मुख्य आकर्षण - Key Highlights |
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| ◉ मंदिर में देवी की मूर्ति को स्वयंभू माना जाता है। |
| ◉ मंदिर की गर्भगृह एक प्राकृतिक चट्टानी गुफा के अंदर स्थित है। |
| ◉ मंदिर परिसर में एक अद्भुत शिवलिंग है जिस पर 1100 लघु शिवलिंग उकेरे गए हैं। |
जागेश्वरी माता मंदिर मध्य प्रदेश के चंदेरी में स्थित सबसे पवित्र शक्ति मंदिरों में से एक है। ऐतिहासिक 'कटी घाटी' के पास पथरीली पहाड़ियों पर स्थित यह मंदिर देवी दुर्गा की स्वयंभू मूर्ति है। मंदिर प्राकृतिक गुफा वाले माहौल और सदियों पुराने आध्यात्मिक महत्व के लिए जाना जाता है। यह एक प्रमुख तीर्थ स्थल है और चंदेरी घूमने आने वाले पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र है।
जागेश्वरी माता मंदिर में दर्शन का समय
यह मंदिर पूरे सप्ताह खुला रहता है और दर्शन का समय सुबह 6:00 बजे से शाम 6:00 बजे तक है।
जागेश्वरी माता मंदिर के मुख्य त्योहार
मंदिर में चैत्र नवरात्रि और शारदीय नवरात्रि दोनों ही बहुत श्रद्धा के साथ मनाए जाते हैं। इन मौकों पर हजारों श्रद्धालु मंदिर आते हैं और एक बड़ा मेला भी लगता है। शिवरात्रि भी धूमधाम से मनाई जाती है।
जागेश्वरी माता मंदिर कैसे पहुँचें
मंदिर मध्य प्रदेश के अशोकनगर जिले के चंदेरी में 'कटी घाटी' पर स्थित है, जो चंदेरी बस स्टैंड से लगभग 2 किलोमीटर दूर है। यह एक पहाड़ी पर स्थित है और यहाँ तक सीढ़ियाँ चढ़कर या चंदेरी किले के रास्ते से पहुँचा जा सकता है। चंदेरी सड़क मार्ग से मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के प्रमुख शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। यहाँ का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन मुंगावली रेलवे स्टेशन है। सबसे नज़दीकी एयरपोर्ट ग्वालियर एयरपोर्ट है।
जागेश्वरी माता मंदिर एक प्राचीन गुफा मंदिर है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार, इस मंदिर का संबंध महाभारत काल से है, जबकि वर्तमान ढांचे के कुछ हिस्से छठी से 11वीं शताब्दी के बीच के माने जाते हैं। यह मंदिर एक पवित्र शक्ति स्थल के रूप में महत्व है और यहाँ मध्य प्रदेश तथा पड़ोसी राज्यों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
मंदिर परिसर में एक अद्भुत शिवलिंग है जिस पर 1,100 छोटे-छोटे शिवलिंग उकेरे गए हैं और एक चार मुख वाला (चतुर्मुख) शिवलिंग भी है, जो इसे वास्तुकला की दृष्टि से अनोखा बनाता है। यहाँ पानी का एक प्राकृतिक स्रोत भी है; ऊपर की चट्टानों से शिवलिंग पर लगातार पानी टपकता रहता है, जिससे मंदिर का माहौल और भी पवित्र हो जाता है।
❀ आरामदायक जूते पहनें, क्योंकि मंदिर तक पहुँचने के लिए सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं।
❀ मंदिर के आस-पास मौजूद बंदरों से सावधान रहें और अपने हाथों में खाना न रखें।
❀ सुहावने मौसम और शांति से दर्शन करने के लिए सुबह-सुबह या शाम को जाएँ।
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