मुख्य आकर्षण - Key Highlights |
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| ◉ मुख्य देवी की मूर्ति की 16 भुजाएँ वाली हैं। |
| ◉ मनोकामना पूरी होने के लिए मंदिर के बांस पर पीले और लाल रंग के पवित्र धागे बांधते हैं। |
| ◉ मंदिर में देवी की पूजा छह दिनों तक आदिवासी पुरोहितों द्वारा की जाती है। |
माँ देवड़ी मंदिर, राँची के पास सबसे पवित्र मंदिरों में से एक है। यह मंदिर देवी दुर्गा के ही एक रूप, माँ देवड़ी को समर्पित है। यह मंदिर राँची-जमशेदपुर मार्ग पर तामर के पास देवड़ी गाँव में स्थित है। यह मंदिर पहले 'देवरी डिरी' के नाम से जाना जाता था, जिसका अर्थ है 'डिउरी गाँव का पवित्र पत्थर'। धार्मिक परंपरा के अनुसार मंदिर में श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने के लिए बांस पर पीले और लाल रंग के पवित्र धागे बांधते हैं। मनोकामना पूरी होने पर वे फिर से मंदिर आकर धागा खोल देते हैं।
माँ देवड़ी मंदिर में दर्शन का समय
माँ देवड़ी मंदिर पूरे हफ्ते खुला रहता है और दर्शन का समय सुबह 6:00 बजे से रात 8:00 बजे तक है।
माँ देवड़ी मंदिर के मुख्य त्योहार
नवरात्रि, दशहरा माँ देवड़ी मंदिर के मुख्य त्योहार है। त्योहारों के समय यहाँ लंबी लाइनें लगती हैं।
माँ देवड़ी मंदिर कैसे पहुँचें
यह मंदिर दिउरी गाँव, तामर, रांची, झारखंड में स्थित है। मंदिर तक सड़क मार्ग से आसानी से पहुँचा जा सकता है। राँची रेलवे स्टेशन यहाँ का सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन है। सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा राँची हवाई अड्डा है।
माँ देवड़ी मंदिर बहुत प्राचीन है माना जाता है मंदिर 16वीं से 20वीं शताब्दी के बीच बना था। इस मंदिर का मुंडा आदिवासी समुदाय से गहरा संबंध है और यहाँ की पूजा-पद्धति में ऐसी परंपराएँ हैं जो कई आम हिंदू मंदिरों से काफी अलग हैं। यहाँ देवी की मूर्ति की 16 भुजाएँ हैं और यह 3 फुट ऊँची है। देवी अपनी भुजाओं में धनुष, ढाल, फूल और परम धारण किए हुए हैं, जिन्हें माँ देवड़ी के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर में देवी की पूजा छह दिनों तक आदिवासी पुरोहितों द्वारा की जाती है, जिन्हें पाहन कहा जाता है, और ब्राह्मण पांडा केवल एक दिन के लिए पूजा करते हैं।
भक्तिभारत के अनुसार, यह मंदिर झारखंड की आदिवासी धार्मिक विरासत से भी गहराई से जुड़ा है, इसलिए यह न केवल तीर्थ स्थल के तौर पर, बल्कि एक सांस्कृतिक पहचान के तौर पर भी महत्वपूर्ण है। यह मंदिर कोई बहुत बड़ा या भव्य परिसर नहीं है, बल्कि आकार में छोटा और पारंपरिक शैली का है। इसकी सबसे खास बात माँ दुर्गा की 16 भुजाओं वाली प्राचीन पत्थर की मूर्ति है। मंदिर का गर्भगृह इसका आध्यात्मिक केंद्र है और इसकी बनावट में खास क्षेत्रीय शैली की झलक मिलती है। इस मंदिर का महत्व इसकी भव्य वास्तुकला के बजाय यहाँ की प्राचीन मूर्ति, पूजा की अनोखी परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के कारण है।
6 AM - 8 PM
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