Haanuman Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

तुलसीदास जी द्वारा ब्राह्मण को जीवन दान - सत्य कथा (Goswami Tulsidas Dwara Brahmin Ko Jeevan Dan)


Add To Favorites Change Font Size
एक मृत ब्राह्मण को जीवन प्रदान करना:
भक्तमाल में वर्णन है कि एक ब्राह्मण था, परंतु कुछ विद्वान बताते है कि वह ब्राह्मण नहीं, एक भुलई नाम का कलवार था जो भक्ति पथ और गोस्वामी जी की निन्दा किया करता था।
उसकी मृत्यु हो गयी, उसकी पत्नी उसके साथ सती होने के लिए जा रही थी। गोस्वामी श्री तुलसीदास जी अपनी कुटी के द्वार पर बैठे हुए भजन कर रहे थे। उस ब्राह्मण की स्त्री ने उन्हें दूर से ही देखा तो फिर श्री चरणों में आकर इन्हें प्रणाम किया।

श्री तुलसीदास जी ने उसे आशीर्वाद देते हुए कहा कि सौभाग्यवती होओ। उस स्त्री ने कहा कि मेरे पति का देहांत हो गया है और मैं सती होने के लिए श्मशान घाट पर जा रही हूँ। तब इस आशीर्वाद का क्या अर्थ होगा?

गोस्वामीजी ने कहा कि अब तो मेरे मुख से आशीर्वाद निकल चूका है, यदि तुम और तुम्हारे परिवार के लोग भगवान श्रीराम का भजन करें तो मै तुम्हारे मृत पति को जीवित कर दूँगा।

यदि काल सत्य है, तो मेरे प्रभु काल के भी काल है, यह बात भी तो सत्य है। उस स्त्री ने अपने सभी कुटुम्बियों को बुलाकर कहा कि यदि आप लोग सच्चे हृदय से श्रीराम भक्ति करने की दृढ़ प्रतिज्ञा करे तो मेरे यह मृत पति जीवित हो जायेंगे।

सभी ने गोस्वामीजी की बात को स्वीकार करते हुए श्रीराम नाम का संकीर्तन प्रारंभ किया। तब गोस्वामी जी ने उसे सुंदर भक्तिमय जीवन दान दिया। श्री राम की कृपा से उस ब्राह्मण को जीवन दान मिल गया और इससे प्रभावित होकर उसके परिवार के लोग भगवद्भक्त हो गए ।
यह भी जानें

Prerak-kahani Shri Ram Prerak-kahaniShri Hanuman Prerak-kahaniTulsidas Prerak-kahaniTrue Story Prerak-kahaniTrue Prerak-kahaniMahila Prerak-kahaniSati Prerak-kahaniMratyu Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

Latest Prerak-kahani ›

प्रणाम का महत्व - प्रेरक कहानी

महाभारत का युद्ध चल रहा था, एक दिन दुर्योधन के व्यंग्य से आहत होकर भीष्म पितामह घोषणा कर देते हैं कि: मैं कल पांडवों का वध कर दूँगा..

जीवन का समस्या चक्र कब खत्म होगा? - प्रेरक कहानी

साधु महाराज: बेटा मैं इस नदी के पानी के सूखने का इंतजार कर रहा हूँ, जब ये सूख जायेगा फिर आराम से नदी पार कर लेंगे।..

जगन्नाथ मंदिर में प्रेम के पद - सत्य कथा

जगन्नाथ जी की सत्य कथा : उड़ीसा में बैंगन बेचनेवाले की एक बालिका थी। दुनिया की दृष्टि से उसमें कोई अच्छाई नहीं थी।

सतगुरु की कृपा से कैसे चोर राजा बना - प्रेरक कहानी

एक बार एक चोर ने गुरु से नाम ले लिया, और बोला गुरु जी चोरी तो मेरा काम है ये तो नहीं छूटेगी मेरे से अब गुरु जी बोले ठीक है म तुझे एक दूसरा नेम देता हुँ..

ईश्वर का न्याय! इसी जन्म मे - प्रेरक कहानी

चलते हुए जब वो तालाब से होकर गुजर रहे थे, तो उन्होंने देखा कि एक धीवर नदी में जाल डाले हुए है। शिष्य यह सब देख खड़ा हो गया और धीवर को अहिंसा परमोधर्म का उपदेश देने लगा।...

क्रोध मे हम, चिल्लाते क्यों हैं? - प्रेरक कहानी

जब वे लोग एक दुसरे से और ज्यादा प्रेम करते तब क्या होता हैं? वे कुछ बोलते नहीं बस फुसफुसाते हैं...

Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP