Haanuman Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

कर्म के साथ भावनाओं का भी महत्व है - प्रेरक कहानी (Karm Ke Sath Bhawanaon Ka Bhi Mahatv Hai)


Add To Favorites Change Font Size
गाय ने केला देखकर मुँह मोड़ लिया, महिला ने गाय के सामने जाकर फिर उसके मुँह मे केला देना चाहा लेकिन गाय ने केला नहीं खाया। परंतु वह महिला केला खिलाने के लिये पीछे ही पड़ गई थी।
जब महिला नहीं मानी, तो गाय ने सींग से मारने का अभिनय किया, तब महिला डरकर बिना केला खिलाये चली गयी।

महिला के जाने के बाद पास खडे साँड ने पूछा- वह इतने प्यार से केला खिला रही थी, आपने केला क्यों नहीं खाया और उसे डराकर भगा भी दिया।

गाय बोली- प्यार नहीं मजबूरी। आज एकादशी है, महिला मुझे केला खिलाकर पुण्य कमाना चाहती है। वैसे यह मुझे कभी नहीं पूछती, गलती से उसके मकान के आगे चली जाती हूँ, तो डंडा लेकर मारने को दौड़ती है।

प्रेम से सूखी रोटी भी मिल जाये, तो अमृत तुल्य है।

जो केवल अपना भला चाहता है, वह दुर्योधन है, जो अपनों का भला चाहता है,वह युधिष्ठिर है और जो सबका भला चाहता है वह श्रीकृष्ण है। अर्थात कर्म के साथ-साथ भावनाएँ भी महत्व रखती हैं।
यह भी जानें

Prerak-kahani Gau Mata Prerak-kahaniSand Prerak-kahaniCow Prerak-kahaniGuru Prerak-kahaniEkadashi Prerak-kahaniLady Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें।

Latest Prerak-kahani ›

शिशु प्रेम लेकर तो आता है - प्रेरक कहानी

भाषा के शब्द भी प्रतीक हैं, हाव-भाव या चित्र भी प्रतीक हैं। किस चीज के प्रतीक? ऑडियो-विजुअल माध्यमों (पुस्तकों, प्रवचनों, चित्रों या चलचित्रों) द्वारा हम जो कुछ भी सिखाते हैं..

स्वयं प्रभु मूर्तिमान होकर जनाबाई का हाथ बंटाते - प्रेरक कहानी

नामदेवजी के साथ जनाबाई का कुछ पारलौकिक सम्बन्ध था। संवत १४०७ में नामदेवजी ने समाधि ली, उसी दिन उनके पीछे-पीछे कीर्तन करती हुई जनाबाई भी विठ्ठल भगवान में विलीन हो गईं।

बहरे भक्त का सत्संग प्रेम - प्रेरक कहानी

एक संत के पास बहरा आदमी सत्संग सुनने आता था। उसे कान तो थे पर वे नाड़ियों से जुड़े नहीं थे। एकदम बहरा, एक शब्द भी सुन नहीं सकता था।

ग्राम देवता की सीख का फल - प्रेरक कहानी

उन्हीं के संस्कारों का परिणाम ये हुआ कि आज कई पीढ़ियों के बाद भी उनका परिवार धर्म की राह पर चलता हुआ फल-फूल रहा है।..

निंदा से सदैव बचना चाहिए - प्रेरक कहानी

एक बार एक राजा ने यह फैसला लिया कि वह प्रतिदिन 100 अंधे लोगों को खीर खिलाया करेगा। एक दिन खीर वाले दूध में सांप ने मुंह डाला

मानवता भीतर के संस्कारों से पनपती है - प्रेरक कहानी

श्री टी.एन. शेषन जब मुख्य चुनाव आयुक्त थे, तो परिवार के साथ छुट्टीयां बिताने के लिए मसूरी जा रहे थे। परिवार के साथ उत्तर प्रदेश से निकलते हुऐ रास्ते में..

जब तक दुख नहीं मिलते, प्रभु की याद नहीं आती - प्रेरक कहानी

फिर सुपरवाईजर ने उसका ध्यान आकर्षित करने के लिए एक १० रु का नोट नीचे फैंका, जो ठीक मजदूर के सामने जा कर गिरा..

Navratri Specials 2026 - Navratri Specials 2026
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP