होलिका दहन | चैत्र नवरात्रि | आज का भजन! | भक्ति भारत को फेसबुक पर फॉलो करें!

प्रार्थना: दया कर दान विद्या का!


भारतीय संस्कृति के अनुसार नित्य प्रातः शिक्षा ग्रहण करने से पहिले माँ सरस्वती या प्रभु की आराधना करने का विधान है। देश के एक हजार से ज्यादा केंद्रीय विद्यालयों और जवाहर नवोदय विद्यालय में बच्चों द्वारा सुबह की सभा में गाई जाने वाली हिंदी प्रार्थना..

दया कर दान विद्या का,
हमें परमात्मा देना,
दया करना हमारी आत्मा में,
शुद्धता देना ।

हमारे ध्यान में आओ,
प्रभु आँखों में बस जाओ,
अँधेरे दिल में आकर के,
प्रभु ज्योति जगा देना ।

बहा दो प्रेम* की गंगा,
दिलों में प्रेम का सागर,
हमें आपस में मिल-जुल के,
प्रभु रहना सीखा देना ।

हमारा धर्म हो सेवा,
हमारा कर्म हो सेवा,
सदा ईमान हो सेवा,
व सेवक जन बना देना ।

वतन के वास्ते जीना,
वतन के वास्ते मरना,
वतन पर जाँ फिदा करना,
प्रभु हमको सीखा देना ।

दया कर दान विद्या का,
हमें परमात्मा देना,
दया करना हमारी आत्मा में,
शुद्धता देना ।

*प्रेम: कुछ लोग "प्रेम" की जगह "ज्ञान" शब्द को प्रयोग में लाते हैं.

ये भी जानें

VandanaSchool VandanaCollage VandanaMaa Saraswati Vandana


अगर आपको यह लेख पसंद आया, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

* यदि आपको इस पेज में सुधार की जरूरत महसूस हो रही है, तो कृपया अपने विचारों को हमें शेयर जरूर करें: यहाँ शेयर करें
** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर शेयर करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ शेयर करें

आरती: माँ सरस्वती वंदना

या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता, या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना।...

प्रार्थना: दया कर दान विद्या का!

देश के एक हजार से ज्यादा केंद्रीय विद्यालयों, जवाहर नवोदय विद्यालय में बच्चों द्वारा सुबह...

संकट मोचन हनुमानाष्टक

लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर। वज्र देह दानव दलन, जय जय जय कपि सूर ॥

प्रार्थना: वह शक्ति हमें दो दया निधे!

उत्तर प्रदेश के साथ अधिकतर उत्तर भारत के सरकारी स्कूल में 1961 से ही गाई जाने वाली सबसे प्रसिद्ध प्रार्थना। वह शक्ति हमें दो दया निधे...

ब्रह्मन्! स्वराष्ट्र में हों...

ब्रह्मन्! स्वराष्ट्र में हों, द्विज ब्रह्म तेजधारी। क्षत्रिय महारथी हों, अरिदल विनाशकारी॥...

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे!

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे, त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्...

श्री राम स्तुति: श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन!

श्री रामचन्द्र कृपालु भजुमन हरण भवभय दारुणं। नव कंज लोचन कंज मुख...

जय राम रमा रमनं समनं।

जय राम राम रमनं समनं। भव ताप भयाकुल पाहि जनम॥ अवधेस सुरेस रमेस बिभो।...

हे जग स्वामी, अंतर्यामी, तेरे सन्मुख आता हूँ!

हे जग स्वामी, अंतर्यामी, तेरे सन्मुख आता हूँ। सन्मुख आता, मैं शरमाता...

श्री हनुमान बाहुक

असहनीय कष्टों से हताश होकर अन्त में उसकी निवृत्ति के लिये गोस्वामी तुलसीदास जी ने हनुमानजी की वन्दना आरम्भ की जो कि ४४ पद्यों के हनुमानबाहुक प्रसिद्ध स्तोत्र लिखा।

close this ads
^
top