Haanuman Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

जो कृष्ण में है, वही तुममें भी। (Jo Krishan Mein Hai Wahi Tum Main Bhi)


Add To Favorites Change Font Size
एक पुरानी कहानी है, एक शेरनी छलांग लगा रही थी। और छलांग के बीच में ही उसको बच्चा हो गया। वह तो छलांग लगाकर चली गई। एक टीले से दूसरे टीले पर! लेकिन बच्चा निचे गिर गया। निचे भेड़ो कि एक कतार गुजरती थी। वह बच्चा भेड़ो में मिल गया। भेड़ो ने उसे पाला -पोसा, बड़ा हुआ। सिंह था तो सिंह ही हुआ। लेकिन एक गलत फहमी में पड़ गया कि खुद को भेड़ मान कर जीने लगा।
एक दिन उसने जब भेड़ो के बीच में एक शेर को भागते देखा, सारी भेड़े भाग गई। वह अकेला रह गया। दूसरे शेर ने इस शेर को पकड़ लिया। यह रोने लगा, मिमियाया, गिड़गिड़ाने लगा। कहने लगा छोड़ दो मुझे। मुझे जाने दो। मेरे सब संगी साथी जा रहे है। दूसरे शेर ने कहा , नालायक, सुन! ये तेरे संगी साथी नहीं है। तेरा दिमाग फिर गया है। तू पागल हो गया है। परन्तु वह नहीं माना। उस बड़े शेर ने उसे पकड़ कर घसीटा, जबरदस्ती उसे ले गया नदी के किनारे।
दोनों ने नदी में झांका। और उस बूढ़े सिंह ने कहा कि देख दर्पण में। देख नदी में। अपना चेहरा देख, मेरा चेहरा देख। पहचान। उसने देखा, पाया, हम दोनों तो एक जैसे हैं। तो मैं भेड़ नहीं हूँ ? एक क्षण में गर्जना हो गई। एक क्षण में ऐसी गर्जना उठी उसके भीतर से, जीवन भर कि दबी हुयी सिंह कि गर्जना, सिंहनाद! पहाड़ कंप गए। बूढ़ा सिंह भी कंप गया। उसने कहा, अरे! अरे इतने जोर से दहाड़ता है? उसने कहा जन्म से दहाड़ा ही नहीं। बड़ी कृपा तुम्हारी जो मुझे जगा दिया। और इसी दहाड़ के साथ उसका जीवन रूपांतरित हो गया।

अगर एक तुम यह देख लो कि जो बुद्ध में है, जो महावीर में है, जो सद्गुरु में है, जो कृष्ण में है वही तुममें भी है, फिर गर्जना निकल जाएगी, अहं ब्रह्मास्मि। मैं ही ब्रह्म हूँ। गूंज उठेंगे पहाड़। कंप जाएंगे पहाड़। और भीतर आनंद ही आनंद होगा।


Read Also
» श्री कृष्ण जन्माष्टमी - Shri Krishna Janmashtami | भोग प्रसाद
» दिल्ली मे कहाँ मनाएँ श्री कृष्ण जन्माष्टमी।
» दिल्ली और आस-पास के प्रसिद्ध श्री कृष्ण मंदिर। | जानें दिल्ली मे ISKCON मंदिर कहाँ-कहाँ हैं? | दिल्ली के प्रमुख श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर।
» ब्रजभूमि के प्रसिद्ध मंदिर! | भारत के चार धाम
» आरती: श्री बाल कृष्ण जी | भोग आरती: श्रीकृष्ण जी | बधाई भजन: लल्ला की सुन के मै आयी!
यह भी जानें
अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

Latest Prerak-kahani ›

भक्त के अधीन भगवान - सदना कसाई की कहानी

एक कसाई था सदना। वह बहुत ईमानदार था, वो भगवान के नाम कीर्तन में मस्त रहता था। यहां तक की मांस को काटते-बेचते हुए भी वह भगवान नाम गुनगुनाता रहता था।

जीवन की ठक-ठक चलती ही रहेगी - प्रेरक कहानी

एक आदमी घोड़े पर कहीं जा रहा था। घोड़े को जोर की प्यास लगी थी। दूर कुएं पर एक किसान बैलों से रहट चलाकर खेतों में पानी लगा रहा था।...

अहंकार का त्याग ही तपस्या का मूलमंत्र है - प्रेरक कहानी

निर्णय करने से पहले धर्मराज ने दोनों से कहा: मैं अपना निर्णय तो सुनाउंगा लेकिन यदि तुम दोनों अपने बारे में कुछ कहना चाहते हो तो मैं अवसर देता हूं, कह सकते हो।...

कर्ण को ही सबसे बड़ा दानी क्यों कहते हैं? - प्रेरक कहानी

एक बार की बात है कि श्री कृष्ण और अर्जुन कहीं जा रहे थे। रास्ते में अर्जुन ने श्री कृष्ण से पूछा कि प्रभु: एक जिज्ञासा है मेरे मन में, अगर आज्ञा हो तो पूछूँ..

विश्वास के आगे पंडितजी का नमन - प्रेरक कहानी

एक सेठ बड़ा धार्मिक था संपन्न भी था। एक बार उसने अपने घर पर पूजा पाठ रखी और पूरे शहर को न्यौता दिया।...

भरे गिलास से, मंदिर की परिक्रमा - प्रेरक कहानी

मैं देखती हूं लोग मंदिर परिसर मे अपने फोन से अपने व्यापार की बात करते है कुछ ने तो मंदिर को ही गपसप करने का स्थान चुन रखा है, कुछ पूजा कम पाखंड ज्यादा करते है।

तुलसीदास जी द्वारा कौशल्यानंदन भगवान् स्थापित - सत्य कथा

कौशल्यानंदन भगवान् श्री राम का विग्रह स्थापित: कुछ लोग दक्षिण देश से भगवान् श्रीराम की मूर्ति लेकर स्थापना करने के लिये श्रीअवध जा रहे थे। यमुना-तट पर उन्होंने विश्राम किया।

Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP