Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

जो कृष्ण में है, वही तुममें भी। (Jo Krishan Mein Hai Wahi Tum Main Bhi)


Add To Favorites Change Font Size
एक पुरानी कहानी है, एक शेरनी छलांग लगा रही थी। और छलांग के बीच में ही उसको बच्चा हो गया। वह तो छलांग लगाकर चली गई। एक टीले से दूसरे टीले पर! लेकिन बच्चा निचे गिर गया। निचे भेड़ो कि एक कतार गुजरती थी। वह बच्चा भेड़ो में मिल गया। भेड़ो ने उसे पाला -पोसा, बड़ा हुआ। सिंह था तो सिंह ही हुआ। लेकिन एक गलत फहमी में पड़ गया कि खुद को भेड़ मान कर जीने लगा।
एक दिन उसने जब भेड़ो के बीच में एक शेर को भागते देखा, सारी भेड़े भाग गई। वह अकेला रह गया। दूसरे शेर ने इस शेर को पकड़ लिया। यह रोने लगा, मिमियाया, गिड़गिड़ाने लगा। कहने लगा छोड़ दो मुझे। मुझे जाने दो। मेरे सब संगी साथी जा रहे है। दूसरे शेर ने कहा , नालायक, सुन! ये तेरे संगी साथी नहीं है। तेरा दिमाग फिर गया है। तू पागल हो गया है। परन्तु वह नहीं माना। उस बड़े शेर ने उसे पकड़ कर घसीटा, जबरदस्ती उसे ले गया नदी के किनारे।
दोनों ने नदी में झांका। और उस बूढ़े सिंह ने कहा कि देख दर्पण में। देख नदी में। अपना चेहरा देख, मेरा चेहरा देख। पहचान। उसने देखा, पाया, हम दोनों तो एक जैसे हैं। तो मैं भेड़ नहीं हूँ ? एक क्षण में गर्जना हो गई। एक क्षण में ऐसी गर्जना उठी उसके भीतर से, जीवन भर कि दबी हुयी सिंह कि गर्जना, सिंहनाद! पहाड़ कंप गए। बूढ़ा सिंह भी कंप गया। उसने कहा, अरे! अरे इतने जोर से दहाड़ता है? उसने कहा जन्म से दहाड़ा ही नहीं। बड़ी कृपा तुम्हारी जो मुझे जगा दिया। और इसी दहाड़ के साथ उसका जीवन रूपांतरित हो गया।

अगर एक तुम यह देख लो कि जो बुद्ध में है, जो महावीर में है, जो सद्गुरु में है, जो कृष्ण में है वही तुममें भी है, फिर गर्जना निकल जाएगी, अहं ब्रह्मास्मि। मैं ही ब्रह्म हूँ। गूंज उठेंगे पहाड़। कंप जाएंगे पहाड़। और भीतर आनंद ही आनंद होगा।


Read Also
» श्री कृष्ण जन्माष्टमी - Shri Krishna Janmashtami | भोग प्रसाद
» दिल्ली मे कहाँ मनाएँ श्री कृष्ण जन्माष्टमी।
» दिल्ली और आस-पास के प्रसिद्ध श्री कृष्ण मंदिर। | जानें दिल्ली मे ISKCON मंदिर कहाँ-कहाँ हैं? | दिल्ली के प्रमुख श्री कृष्ण प्रणामी मंदिर।
» ब्रजभूमि के प्रसिद्ध मंदिर! | भारत के चार धाम
» आरती: श्री बाल कृष्ण जी | भोग आरती: श्रीकृष्ण जी | बधाई भजन: लल्ला की सुन के मै आयी!
यह भी जानें
अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

Latest Prerak-kahani ›

सन्त की दूरदर्शिता - प्रेरक कहानी

एक सन्त के पास 30 सेवक रहते थे। एक सेवक ने गुरुजी के आगे प्रार्थना की - महाराज जी! मेरी बहन की शादी है तो आज एक महीना रह गया है तो मैं दस दिन के लिए वहाँ जाऊँगा। गुरु की महिमा गुरु ही जाने।

पुरुषार्थ की निरंतरता - प्रेरक कहानी

आज की कहानी के नायक अंगूठा छाप तन्विक पढ़े लिखे तो नहीं थे पर हुनरमंद अवश्य थे। वह पेशे से एक माली हैं और बंजर धरा को हरीभरी करने की कला में माहिर हैं।

ऋण तो चुकाना ही होगा - प्रेरक कहानी

भाई ! तुम उधार कब लौटाओगे ? इस जन्म में या फिर अगले जन्म में ?

आराम मे भी राम भाजो - प्रेरक कहानी

कुंदन काका प्रतियोगिता जीत चुके थे। उन्हें 1000 रुपये इनाम में दिए गए। तभी उस हारे हुए मजदूर ने पूछा- काका, मैं अपनी हार मानता हूँ। ..

मन को कभी भी निराश न होने दें - प्रेरक कहानी

मन को कभी भी निराश न होने दें, बड़ी से बड़ी हानि में भी प्रसन्न रहें। मन उदास हो गया तो आपके कार्य करने की गति धीमी हो जाएगी। इसलिए मन को हमेशा प्रसन्न रखने का प्रयास।

कर्म कैसे फल देता है? - प्रेरक कहानी

ज्योतिष कहता है कि मनुष्य अपने ही कर्मो का फल पाता है। कर्म कैसे फल देता है? यह इस प्रसंग से समझे..

पीपल एवं पथवारी की कथा - प्रेरक कहानी

एक बुढ़िया थी। उसने अपनी बहू से कहा तू दूध दही बेच के आ। वह बेचने गई तो रास्ते में औरतें पीपल पथवारी सींच रहीं थीं..

Durga Chalisa - Durga Chalisa
Ram Bhajan - Ram Bhajan
Bhakti Bharat APP