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बसवा (Basava)


भक्तमाल | बसवा
असली नाम: जगद्गुरु बसवेश्वर
अन्य नाम - बसवेश्वर और बसवन्ना
गुरु - ईशान्या गुरु
शिष्य - अक्का महादेवी
आराध्य - भगवान शिव
जन्म - 1131
जन्म स्थान - विजयपुरा ज़िला, कर्नाटक, भारत
मृत्यु - 1196
वैवाहिक स्थिति - विवाहित
पिता - माधवरस
माता - मदलंबिके
जीवनसाथी - नीलांबिके
संस्थापक - लिंगायत परंपरा (या लिंगायतवाद)
प्रसिद्धि - दार्शनिक, कवि, समाज सुधारक, राजनेता
बसवा (जिन्हें बसवन्ना या बसवेश्वर के नाम से भी जाना जाता है) 12वीं सदी के एक दार्शनिक, कवि, राजनेता और समाज सुधारक थे। उन्हें लिंगायत आंदोलन के मुख्य लोगों में से एक माना जाता है।

जगद्गुरु बसवेश्वर के कुछ प्रमुख योगदान इस प्रकार हैं:
❀ सामाजिक समानता: उन्होंने कठोर जाति व्यवस्था को चुनौती दी और इस विचार को बढ़ावा दिया कि जन्म के आधार पर नहीं, बल्कि सभी लोग समान हैं।
❀ बसवा ने सैकड़ों 'वचन' रचे—ये सरल कन्नड़ में लिखी गई छोटी और प्रभावशाली कविताएँ थीं। उन्होंने 'कायकावे कैलासा' ("काम ही पूजा है") का संदेश दिया और आध्यात्मिक संतुष्टि के लिए ईमानदारी से मेहनत करने पर ज़ोर दिया।
❀ दूसरों के साथ बांटना: उन्होंने 'दसोहा' को बढ़ावा दिया, जो अपनी कमाई का इस्तेमाल ज़रूरतमंदों की मदद के लिए करने की परंपरा है।
❀ आध्यात्मिक भक्ति: उन्होंने बिना किसी जटिल रीति-रिवाज या बिचौलिए के 'इष्टलिंग' के प्रति सीधी भक्ति की वकालत की।
❀ साहित्यिक विरासत: उन्होंने कन्नड़ में 'वचन' नाम की छोटी काव्यात्मक बातें लिखीं, जिनका साहित्य और दर्शन में आज भी बहुत प्रभाव है।

उन्होंने सिखाया कि हर व्यक्ति बिना किसी बिचौलिए के सीधे भगवान शिव से जुड़ सकता है। उनके अनुयायी एक निजी 'इष्टलिंग' धारण करते थे, जो उनके भीतर शिव की मौजूदगी का प्रतीक था। इससे मंदिर के जटिल रीति-रिवाजों और पुजारियों के माध्यम से पूजा करने की निर्भरता खत्म हो गई। शरण बसवेश्वर मंदिर के बारे में पढ़ें।

बसवा ने 'अनुभव मंटप' की भी स्थापना की, जिसे अक्सर खुली दार्शनिक और सामाजिक चर्चा के शुरुआती मंचों में से एक माना जाता है; यहाँ अलग-अलग पृष्ठभूमि के लोग विचारों के आदान-प्रदान के लिए इकट्ठा होते थे। हर साल बसवा जयंती पर उनका जन्मदिन मनाया जाता है, जो आमतौर पर हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार अप्रैल या मई में आता है।

Basava in English

Basava (also known as Basavanna or Basaveshwara) was a 12th-century philosopher, poet, statesman, and social reformer. He is considered one of the key figures of the Lingayat movement.
यह भी जानें

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