अभय मुद्रा का आध्यात्मिक महत्व
अभय मुद्रा हिंदू और बौद्ध धर्म में उपयोग की जाने वाली एक मुद्रा (हाथ का इशारा) है।
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"मधुपर्क" एक वह पदार्थ/पेय है की जो विवाह में वर जब वधू के द्वारपर आता है, तो उसे वधू पक्ष की ओरसे बडे आदरसे प्राशीत किया जाता है |
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ब्रज के भावनात्मक 12 ज्योतिर्लिंग
ब्रजेश्र्वर महादेव: (बरसाना)श्री राधा रानी के पिता भृषभानु जी भानोखर सरोवर मे स्नान करके नित्य ब्रजेश्वर महादेव की पूजा करते थे।
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प्रयाग के संगम तट पर एक माह रहकर लोग कल्पवास करते हैं। यह परम्परा सदियों से चली आ रही है। ’कल्पवास‘ एक ऐसा व्रत है जो प्रयाग आदि तीर्थों के तट पर किया जाता है।
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ऑस्ट्रेलिया में प्रसिद्ध हिंदू मंदिर कौन से हैं?
ऑस्ट्रेलिया में हिंदुओं के लिए बड़ी संख्या में मंदिर परिसर और समुदाय हैं, जो ऑस्ट्रेलिया में आने वाले प्रत्येक भारतीय का स्वागत करते हैं। इसलिए, यदि आप घर से बाहर महसूस कर रहे हैं या पूजा करने के लिए जगह की तलाश कर रहे हैं तो ये मंदिर ऑस्ट्रेलिया में घूमने के लिए सही जगह हैं।
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अमेरिका में सबसे प्रसिद्ध शीर्ष 10 हिंदू मंदिर
अमेरिका अपनी सांस्कृतिक विविधता पर गर्व करने वाला देश है और उनमें से कई हिंदू भी हैं। 2008 से राष्ट्रीय सर्वेक्षण के आंकड़ों के अनुसार, अमेरिका में 2.69 मिलियन हिंदू नागरिक हैं इसलिए अमेरिका (यूएसए) में कई हिंदू मंदिर भी हैं। आइये जानते हैं अमेरिका के 10 सर्बश्रेठ हिंदूमंदिरों के बारे मैं।
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दण्डी सन्यासी का क्या अर्थ है?
डंडा का अर्थ संस्कृत में छड़ी या बेंत होता है और इस छड़ी को रखने वाले सन्यासी को दंडी सन्यासी कहा जाता है। देश में संतों के एक महत्वपूर्ण संप्रदाय दंडी सन्यासियों का दावा है कि शंकराचार्य उन्हीं में से चुने गए हैं।
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(कृष्ण और शुक्ल) पक्ष क्या है?
हिन्दू पंचांग में एक महीने को 30 दिनों में विभाजित किया गया है। इसे 30 दिनों को फिर दो पक्षों में बांटा गया है। 15 दिनों के एक पक्ष को शुक्ल पक्ष और शेष 15 दिनों को कृष्ण पक्ष माना जाता है। चन्द्रमा की आकार के अनुसार शुक्ल और कृष्ण पक्ष गणना किया गया है।
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दिनभर पूजा की भोग, फूल, चुनरी, आदि सामिग्री चढ़ाई - पुण्य; पूजा के बाद, गन्दिगी के लिए समान पेड़/नदी के पास फेंक दिया - अधूरा पुण्य
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कुल्लू में एक अनोखा दशहरा दशमी तिथि से शुरू होता है और अगले 7 दिनों तक चलता है। इस दशहरे में रावण कभी नहीं जलता।
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ग्रहण काल के दौरान सूतक क्या है?
हिंदू मान्यताओं के अनुसार ग्रहण दो प्रकार के होते हैं, सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण और ग्रहण से पहले का कुछ अशुभ समय सूतक के नाम से जाना जाता है। मान्यताओं के अनुसार सूतक के दौरान पृथ्वी का वातावरण प्रदूषित हो जाता है और किसी भी हानिकारक दुष्प्रभाव से बचने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
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पुनर्जन्म क्या है, और क्यों होता है?
प्रश्न: पुनर्जन्म किसको कहते हैं ?
उत्तर: जब जीवात्मा एक शरीर का त्याग करके किसी दूसरे शरीर में जाती है तो इस बार बार जन्म लेने की क्रिया को पुनर्जन्म कहते हैं ।
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हिंदू कैलेंडर में पंचांग एक अनिवार्य हिस्सा है, जो हिंदू रीति-रिवाजों की पारंपरिक इकाइयों का पालन करता है, और महत्वपूर्ण तीथियां प्रस्तुत करता है और एक सारणीबद्ध रूप में गणना करता है।
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