Shri Ram Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

मदन मोहन अष्टकम (Madana Mohana Ashtakam)


मदन मोहन अष्टकम
Add To Favorites Change Font Size
जय शङ्खगदाधर नीलकलेवर
पीतपटाम्बर देहि पदम् ।
जय चन्दनचर्चित कुण्डलमण्डित
कौस्तुभशोभित देहि पदम् ॥१॥
जय पङ्कजलोचन मारविमोहन
पापविखण्डन देहि पदम् ।
जय वेणुनिनादक रासविहारक
वङ्किम सुन्दर देहि पदम् ॥२॥

जय धीरधुरन्धर अद्भुतसुन्दर
दैवतसेवित देहि पदम् ।
जय विश्वविमोहन मानसमोहन
संस्थितिकारण देहि पदम् ॥३॥

जय भक्तजनाश्रय नित्यसुखालय
अन्तिमबान्धव देहि पदम् ।
जय दुर्जनशासन केलिपरायण
कालियमर्दन देहि पदम् ॥४॥

जय नित्यनिरामय दीनदयामय
चिन्मय माधव देहि पदम् ।
जय पामरपावन धर्मपरायण
दानवसूदन देहि पदम् ॥५॥

जय वेदविदांवर गोपवधूप्रिय
वृन्दावनधन देहि पदम् ।
जय सत्यसनातन दुर्गतिभञ्जन
सज्जनरञ्जन देहि पदम् ॥६॥

जय सेवकवत्सल करुणासागर
वाञ्छितपूरक देहि पदम् ।
जय पूतधरातल देवपरात्पर
सत्त्वगुणाकर देहि पदम् ॥७॥

जय गोकुलभूषण कंसनिषूदन
सात्वतजीवन देहि पदम् ।
जय योगपरायण संसृतिवारण
ब्रह्मनिरञ्जन देहि पदम् ॥८॥
॥ इति श्रीमदनमोहनाष्टकं सम्पूर्णम् ॥
यह भी जानें

Mantra Shri Krishna MantraBrij MantraBaal Krishna MantraBhagwat MantraJanmashtami MantraLaddu Gopal MantraRadhashtami MantraMusic Class MantraMusic Learning MantraHoli MantraPhulera Dooj Mantra

अन्य प्रसिद्ध मदन मोहन अष्टकम वीडियो

अगर आपको यह मंत्र पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस मंत्र को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

मंत्र ›

मधुराष्टकम्: अधरं मधुरं वदनं मधुरं

अधरं मधुरं वदनं मधुरं नयनं मधुरं हसितं मधुरं। हृदयं मधुरं गमनं मधुरं मधुराधिपते रखिलं मधुरं॥

श्री जानकी स्रोत्र - जानकि त्वां नमस्यामि

जानकि त्वां नमस्यामि सर्वपापप्रणाशिनीम् ॥ दारिद्र्यरणसंहर्त्रीं भक्तानाभिष्टदायिनीम् । विदेहराजतनयां राघवानन्दकारिणीम् ॥..

श्रील प्रभुपाद प्रणति

नम ॐ विष्णु-पादाय कृष्ण-प्रेष्ठाय भूतले, श्रीमते भक्तिवेदांत-स्वामिन् इति नामिने ।

सदाशिव अष्टकम्

सुवर्णपद्मिनी-तटान्त-दिव्यहर्म्य-वासिने, सुपर्णवाहन-प्रियाय सूर्यकोटि-तेजसे । अपर्णया विहारिणे फणाधरेन्द्र-धारिणे, सदा नमश्शिवाय ते सदाशिवाय शंभवे ॥

श्री वेंकटेश्वर सुप्रभातम् - M.S.सुब्बुलक्ष्मी

कौसल्या सुप्रजा राम पूर्वासंध्या प्रवर्तते । उत्तिष्ठ नरशार्दूल कर्तव्यं दैवमाह्निकम् ॥ 1 ॥

आदित्य-हृदय स्तोत्र

ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम् । रावणं चाग्रतो दृष्टवा युद्धाय समुपस्थितम् ॥ दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम् ।

श्री हनुमान स्तवन - श्रीहनुमन्नमस्कारः

प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ज्ञानघन ।.. गोष्पदी कृत वारीशं मशकी कृत राक्षसम् ।..

Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP