नवरात्रि विशेष 2026 - Navratri Specials 2026
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

जैसी संगत वैसी रंगत - प्रेरक कहानी (Jaisi Sangat Vaisi Rangat)


Add To Favorites Change Font Size
एक बार एक भंवरे की मित्रता एक गोबरी कीड़े के साथ हो गई, कीड़े ने भंवरे से कहा कि भाई तुम मेरे सबसे अच्छे मित्र हो। इस लिये मेरे यहाँ भोजन पर आओ, अब अगले दिन भंवरा सुबह-सुबह तैयार हो गया और अपने बच्चो के साथ गोबरी कीड़े के यहाँ भोजन के लिये पहुँचा।
कीड़ा भी उन को देखकर बहुत खुश हुआ और सब का आदर करके भोजन परोसा। भोजन में गोबर की गोलियां परोसी गई और कीड़े ने कहा कि खाओ भाई रुक क्यों गए। भंवरा सोच में पड़ गया, कि मैने बुरे का संग किया। इस लिये मुझे तो, गोबर खाना ही पड़ेगा। भंवरा ने सोचा कि ये मुझे इस का संग करने से मिला और फल भी पाया।

अब इस को भी मेरे संग का फल मिलना चाहिये..
भंवरा बोला भाई! आज तो में आप के यहाँ भोजन के लिये आया। अब तुम कल मेरे यहाँ आओगे। अगले दिन कीड़ा तैयार होकर भंवरे के यहाँ पहुँचा। भवरे ने कीड़े को उठा कर, गुलाब के फूल में बिठा दिया और रस पिलाया। कीड़े ने खूब फूलो का रस पिया और मजे किये अपने मित्र का धन्यवाद किया और कहाँ मित्र तुम तो बहुत अच्छी जगह रहते हो और अच्छा खाते हो।

इस के बाद कीड़े ने सोचा क्यों न अब में यहीं रहूँ और ये सोच कर यही फूल में बैठा रहा, इतने में ही पास के मंदिर का पुजारी आया और फूल तोड़ कर ले गया। और चढ़ा दिया इस को प्रभु चरणों में... कीड़े को भगवान के दर्शन भी हुवे और उनके चरणों में बैठा
इस के बाद सन्ध्या में पुजारी ने सारे फूल इक्कठा किये और गंगा जी में छोड़ दिए। कीड़ा गंगा की लहरों पर लहर रहा था। और अपनी किस्मत पर हैरान था, कि कितना पूण्य हो गया।

इतने में ही भंवरा उड़ता हुवा कीड़े के पास आया और बोला मित्र अब बताओ क्या हाल है?
कीड़ा बोला भाई अब जन्म-जन्म के पापो से मुक्ति हो चुकी है। जहाँ गंगा जी में मरने के बाद अस्थियो को छोड़ा जाता है, वहाँ में जिन्दा ही आ गया हूं। ये सब मुझे तेरी मित्रता और अच्छी संगत का ही फल मिला है और ख़ुशी से निहाल हूं।
तेरा धन्यवाद ! जिसको में अपनी जन्नत समझता था वो गन्दगी थी और जो तेरी वजह से मिला
ये ही स्वर्ग है।

किसी महात्मा ने सही कहा है:
जैसे संग करोगे वैसे बन जाओगे
शराबी का संग करोगे, शराबी बन जाओगे ।
जुआरी का संग करोगे, जुआरी बन जाओगे ।
स्वार्थी या संग करोगे, स्वार्थी बन जाओगे ।
दानी का संग करोगे, दानी बन जाओगे ।
संतो, भक्तो का संग करोगे, तो प्रभु से प्रेम ।
यह भी जानें

Prerak-kahani Bhawara Prerak-kahaniGobar Prerak-kahaniGobar Ka Keeda Prerak-kahaniGanga Prerak-kahaniMandir Prerak-kahaniBhagwan Ke Charan Prerak-kahaniFriendship Prerak-kahaniFriend Prerak-kahaniDosti Prerak-kahaniGangaji Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

Latest Prerak-kahani ›

विष्णु अर्पण - प्रेरक कहानी

कुछ पंडितों ने एक औरत को कहा - घर में तू विष्णु जी की फोटो रख ले और रोटी खाने से पहले उनके आगे रोटी की थाली रखना कर कहना है विष्णु अर्पण..

कर्म के साथ भावनाओं का भी महत्व है - प्रेरक कहानी

एक गाय घास चरने के लिए एक जंगल में चली गई। शाम ढलने के करीब थी। उसने देखा कि एक बाघ उसकी तरफ दबे पांव बढ़ रहा है।..

शत्रु को मित्र कैसे बनाएं? - प्रेरक कहानी

एक राजा था। उसने एक सपना देखा। सपने में उससे एक परोपकारी साधु कह रहा था कि, बेटा! कल रात को तुम्हें एक विषैला सांप काटेगा...

जीवन मे गुरु की आवश्यकता क्यों? - प्रेरक कहानी

एक गाय घास चरने के लिए एक जंगल में चली गई। शाम ढलने के करीब थी। उसने देखा कि एक बाघ उसकी तरफ दबे पांव बढ़ रहा है।..

संस्कार क्या है? - प्रेरक कहानी

यह बात सुनकर बच्चे को राजा पर गुस्सा आया और माँ से बोला: माँ मैं इसका बदला लूंगा।

यह भटकाव ही इंसान को थका रहा है - प्रेरक कहानी

इंसान अपने लक्ष्य से भटक रहा है और यह भटकाव ही इंसान को थका रहा है। यह लक्ष्य प्राप्ति में सबसे बड़ी बाधा है।

भरे हुए में राम को स्थान कहाँ? - प्रेरक कहानी

लोभ, लालच, ईर्ष्या, द्वेष और भली-बुरी बातों से जब दिल-दिमाग भरा रहेगा तो उसमें ईश्वर का वास कैसे होगा?

Om Jai Jagdish Hare Aarti - Om Jai Jagdish Hare Aarti
Ram Bhajan - Ram Bhajan
Bhakti Bharat APP