करवा चौथ | अहोई अष्टमी | आज का भजन!

गुरुदेव दया करके मुझको अपना लेना।


मैं शरण पड़ा तेरी चरणों में जगह देना,
गुरुदेव दया करके मुझको अपना लेना ।

करूणानिधि नाम तेरा,
करुन दिखलाओ तुम,
सोये हुए भाग्यो को,
हे नाथ जगाओ तुम ।
मेरी नाव भवर डोले,
इसे पार लगा देना,
गुरुदेव दया करके,
मुझको अपना लेना ॥

जय गुरुदेवा, जय गुरुदेवा ।
जय गुरुदेवा, जय गुरुदेवा ॥

तुम सुख के सागर हो,
निर्धन के सहारे हो,
इस तन में समाये हो,
मुझे प्राणों से प्यारे हो ।
नित्त माला जपूँ तेरी,
नहीं दिल से भुला देना,
गुरुदेव दया करके,
मुझको अपना लेना ॥

पापी हूँ या कपटी हूँ,
जैसा भी हूँ तेरा हूँ,
घर बार छोड़ कर,
मैं जीवन से खेला हूँ ।
दुःख का मार हूँ मैं,
मेरा दुखड़ा मिटा देना,
गुरुदेव दया करके,
मुझको अपना लेना ॥

मैं सब का सेवक हूँ,
तेरे चरणों का चेरा हूँ,
नहीं नाथ भुलाना मुझे,
इसे जग में अकेला हूँ ।
तेरे दर का भिखारी हूँ,
मेरे दोष मिटा देना,
गुरुदेव दया करके,
मुझको अपना लेना ॥

इन चरनन की पाऊं सेवा,
जय गुरुदेवा, जय गुरुदेवा ।

यह भी जानें

BhajanGuru BhajanGurudev BhajanGuru Purnima BhajanVyasa Purnima Bhajan


अगर आपको यह लेख पसंद आया, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

* यदि आपको इस पेज में सुधार की जरूरत महसूस हो रही है, तो कृपया अपने विचारों को हमें शेयर जरूर करें: यहाँ शेयर करें
** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर शेयर करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ शेयर करें

इक दिन वो भोले भंडारी बन करके ब्रज की नारी!

इक दिन वो भोले भंडारी बन करके ब्रज की नारी, ब्रज/वृंदावन में आ गए।

जय राधा माधव, जय कुन्ज बिहारी!

जय राधा माधव, जय कुन्ज बिहारी, जय गोपी जन बल्लभ, जय गिरधर हरी...

जय जय सुरनायक जन सुखदायक

जय जय सुरनायक जन सुखदायक प्रनतपाल भगवंता। गो द्विज हितकारी जय असुरारी सिधुंसुता प्रिय कंता ॥

भजन: राम कहने से तर जाएगा!

राम कहने से तर जाएगा, पार भव से उतर जायेगा। उस गली होगी चर्चा तेरी...

मेरे मन के अंध तमस में...

मेरे मन के अंध तमस में, ज्योतिर्मय उतारो। जय जय माँ...

भजन: रघुपति राघव राजाराम

रघुपति राघव राजाराम, पतित पावन सीताराम ॥ सुंदर विग्रह मेघश्याम, गंगा तुलसी शालग्राम...

भजन: भेजा है बुलावा, तूने शेरा वालिए

भेजा है बुलावा, तूने शेरा वालिए, ओ मैया तेरे दरबार, में हाँ तेरे दीदार, कि मैं आऊंगा, कभी न फिर जाऊँगा...

भजन: मैं तो आरती उतारूँ रे संतोषी माता की।

मैं तो आरती उतारूँ रे संतोषी माता की। जय जय संतोषी माता जय जय माँ॥

भजन: तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये!

साँची ज्योतो वाली माता, तेरी जय जय कार। तुने मुझे बुलाया शेरा वालिये, मैं आया मैं आया शेरा वालिये।

भजन: रम गयी माँ मेरे रोम रोम में!

रम गयी माँ मेरे रोम रोम में... मेरी सांसो में अम्बे के नाम की धारा बहती. इसीलिए तो मेरी जिह्वा हर समय ये कहती...

top