भक्तमाल | मार्कंडेय
असली नाम – मार्कंडेय
अन्य नाम – चिरंजीवी
गुरु - भगवान ब्रह्मा
शिष्य - क्रौष्टुकी
आराध्य - शिव
जन्म - हिंदू चंद्र कैलेंडर के माघ महीने के शुक्ल पक्ष का 13वां दिन।
वैवाहिक स्थिति: अविवाहित
पिता - मृकंड
माता - मनस्विनी
प्रसिद्ध नाम: मार्कंडेय ऋषि
मार्कंडेय (जिन्हें मार्कंडेय ऋषि भी कहा जाता है) हिंदू परंपरा में एक सम्मानित ऋषि हैं, जो अपनी भक्ति और अमरता के लिए जाने जाते हैं।
मार्कंडेय के बारे में मुख्य बातें:
❀ वे ऋषि मृकंडु और उनकी पत्नी मनस्विनी के पुत्र थे।
❀ पौराणिक कथाओं के अनुसार, उनकी मृत्यु 16 वर्ष की आयु में होनी तय थी।
❀ शिव के परम भक्त होने के नाते, जब मृत्यु के देवता यम उन्हें लेने आए, तो उन्होंने शिव लिंग को कसकर पकड़ लिया।
❀ शिव ने हस्तक्षेप किया, यम को हराया और मार्कंडेय को सदा युवा रहने का वरदान और लंबी आयु प्रदान की।
❀ वे मार्कंडेय पुराण से जुड़े हैं, जो प्रमुख पुराण ग्रंथों में से एक है।
❀ प्रसिद्ध देवी महात्म्य (दुर्गा सप्तशती,
श्री चण्डी-ध्वज स्तोत्रम्,) जो देवी माँ को समर्पित एक महत्वपूर्ण ग्रंथ है, मार्कंडेय पुराण का ही एक हिस्सा है।
मार्कंडेय को अक्सर अटूट भक्ति, मृत्यु पर विजय और दैवीय कृपा का प्रतीक माना जाता है।
हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, ऋषि मार्कंडेय को अमर माना जाता है और उनकी गिनती आठ चिरंजीवियों में होती है - वे पुण्यात्माएँ जो कई ब्रह्मांडीय युगों तक पृथ्वी पर जीवित रहने के लिए अभिशप्त या वरदान-प्राप्त हैं।
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