Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

पितृ गायत्री मंत्र (Pitra Gaytri Mantra)


ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च ।
नमः स्वाहायै स्वाधायै नित्यमेव नमो नमः ॥
ॐ पितृभ्यो नमः ॥
यह भी जानें
मंत्र का मूल रूप

ॐ सिद्धमिदमासनमिह सिद्धमित्यभिधाय ॐ भूः ॐ भुवः ॐ स्वः ॐ महः
ॐ जनः ॐ तपः ॐ सत्यमिति सप्तव्याहृतिभिः पूर्वमुखन्देवब्राह्मणोपवेशनम् ।
उत्तरदिङ्मुखंपितृब्राह्मयोणोपवेशनम् ।
ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च ।
नमः स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव भवन्तुते इति त्रिर्जपेत् ॥ १,२१८.६॥
- गरुडपुराणम् / आचारकाण्डः / अध्यायः २१८ / ६

Mantra Pitra Gayatri MantraVadic MantraPitra MantraGayatri Mantra

अगर आपको यह मंत्र पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस मंत्र को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

मंत्र ›

ॐ श्री विष्णु मंत्र: मङ्गलम् भगवान विष्णुः

ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥ शान्ताकारम् भुजगशयनम्... मङ्गलम् भगवान विष्णुः...

गजेंद्र मोक्ष स्तोत्र - श्री विष्णु

एवं व्यवसितो बुद्ध्या समाधाय मनो हृदि । जजाप परमं जाप्यं प्राग्जन्मन्यनुशिक्षितम...

रङ्गपुर विहार

पल्लवि: - रङ्गपुर विहार जय कोदण्ड रामावतार रघुवीर श्री | अनुपल्लवि: -अङ्गज जनक देव बृन्दावन सारङ्गेन्द्र वरद रमान्तरङ्ग

रंगनाथ अष्टकम

आनन्दरूपे निजबोधरूपे ब्रह्मस्वरूपे श्रुतिमूर्तिरूपे । शशाङ्करूपे रमणीयरूपे श्रीरङ्गरूपे रमतां मनो मे ॥ १॥

श्रीमहालक्ष्मीस्तोत्रम् विष्णुपुराणान्तर्गतम्

सिंहासनगतः शक्रस्सम्प्राप्य त्रिदिवं पुनः। देवराज्ये स्थितो देवीं तुष्टावाब्जकरां ततः॥

विष्णु सहस्रनाम: M.S.Subbulakshmi

भगवान श्री विष्णु के 1000 नाम! विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने वाले व्यक्ति को यश, सुख, ऐश्वर्य, संपन्नता...

वक्रतुण्ड महाकाय - गणेश मंत्र

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Hanuman Chalisa - Hanuman Chalisa
Bhakti Bharat APP