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पितृ गायत्री मंत्र (Pitra Gaytri Mantra)


ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च ।
नमः स्वाहायै स्वाधायै नित्यमेव नमो नमः ॥
ॐ पितृभ्यो नमः ॥
यह भी जानें
मंत्र का मूल रूप

ॐ सिद्धमिदमासनमिह सिद्धमित्यभिधाय ॐ भूः ॐ भुवः ॐ स्वः ॐ महः
ॐ जनः ॐ तपः ॐ सत्यमिति सप्तव्याहृतिभिः पूर्वमुखन्देवब्राह्मणोपवेशनम् ।
उत्तरदिङ्मुखंपितृब्राह्मयोणोपवेशनम् ।
ॐ देवताभ्यः पितृभ्यश्च महायोगिभ्य एव च ।
नमः स्वधायै स्वाहायै नित्यमेव भवन्तुते इति त्रिर्जपेत् ॥ १,२१८.६॥
- गरुडपुराणम् / आचारकाण्डः / अध्यायः २१८ / ६

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मंत्र ›

श्री अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम

सुमनस वन्दित सुन्दरि माधवि, चन्द्र सहोदरि हेममये, मुनिगण वन्दित मोक्षप्रदायिनि, मंजुल भाषिणी वेदनुते ।

आदित्य-हृदय स्तोत्र

ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम् । रावणं चाग्रतो दृष्टवा युद्धाय समुपस्थितम् ॥ दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम् ।

दामोदर अष्टकम

नमामीश्वरं सच्-चिद्-आनन्द-रूपं, लसत्-कुण्डलं गोकुले भ्राजमनम्य, शोदा-भियोलूखलाद् धावमानं

श्री हनुमान स्तवन - श्रीहनुमन्नमस्कारः

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संकट मोचन हनुमानाष्टक

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दशरथकृत शनि स्तोत्र

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श्री महालक्ष्मी अष्टक

नमस्तेस्तू महामाये श्रीपिठे सूरपुजिते । शंख चक्र गदा हस्ते महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥

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