Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

बुढ़िया माई को मुक्ति दी - तुलसी माता की कहानी (Budiya Mai Ko Tulsi Mata Dwara Mukti)


बुढ़िया माई को मुक्ति दी - तुलसी माता की कहानी
Add To Favorites Change Font Size
कार्तिक महीने में एक बुढ़िया माई तुलसीजी को सींचती और कहती कि: हे तुलसी माता! सत की दाता मैं तेरा बिडला सीचती हूँ,
मुझे बहु दे,
पीताम्बर की धोती दे,
मीठा-मीठा गास दे,
बैकुंठा में वास दे,
चटक की चाल दे,
पटक की मोत दे,
चंदन का काठ दे,
रानी सा राज दे,
दाल भात का भोजन दे,
ग्यारस की मौत दे,
कृष्ण जी का कन्धा दे ।
तब तुलसी माता यह सुनकर सूखने लगीं तो भगवान ने पूछा कि: हे तुलसी! तुम क्यों सूख रही हो?
तुलसी माता ने कहा कि: एक बुढ़िया रोज आती है और यही बात कह जाती है। मैं सब बात तो पूरा कर दूँगी लेकिन कृष्ण का कन्धा कहाँ से लाऊँगी।

तो भगवान बोले: जब वो मरेगी तो मैं अपने आप कंधा दे आऊँगा। तू बुढ़िया माई से कह देना।

जब बुढिया माई मर गई। सब लोग आ गये। जब माई को ले जाने लगे तो वह किसी से न उठी। तब भगवान एक बारह बरस के बालक का रूप धारण करके आये। बालक ने कहा मैं कान में एक बात कहूँगा तो बुढ़िया माई उठ जाएगी। बालक ने कान में कहा:
बुढ़िया माई मन की निकाल ले,
पीताम्बर की धोती ले,
मीठा-मीठा गास ले,
बेकुंठा का वास ले,
चटक की चाल ले,
पटक की मोत ले,
कृष्ण जी का कन्धा ले..
यह सुनकर बुढ़िया माई हल्की हो गई। भगवान ने कन्धा दिया और बुढ़िया माई को मुक्ति मिल गई।

हे तुलसी माता! जैसे बुढ़िया माई को मुक्ति दी बैसे सबको देना।
यह भी जानें

Prerak-kahani Kartik Mas Prerak-kahaniKartik Snaan Prerak-kahaniOld Lady Prerak-kahaniBudiya Mai Prerak-kahaniTulasi Mata Prerak-kahaniTulasi Mahima Prerak-kahaniEkadashi Prerak-kahaniISKCON Prerak-kahaniKartik Purnima Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें।

Latest Prerak-kahani ›

बुराई का अंत हर हाल में होता है - प्रेरक कहानी

एक सांप को एक बाज़ आसमान पे ले कर उड राहा था। अचानक पंजे से सांप छूट गया और कुवें मे गिर गया बाज़ ने बहुत कोशिश की अखिर थक हार कर चला गया।

कोयल- अपनी वाणी को मधुर बना लेना

कुछ देर बैठो, बातें करते हैं.. कौआ- वह जरा जल्दी में है और देश को छोड़कर परदेस जा रहा है।...

जब मुँह खोलोगे ही नहीं तो फँसोगे कैसे? - प्रेरक कहानी

एक मछलीमार कांटा डाले तालाब के किनारे बैठा था। काफी समय बाद भी कोई मछली कांटे में नहीं फँसी, ना ही कोई हलचल हुई तो वह सोचने लगा...

निस्वार्थ भाव से दान पुण्य करें - प्रेरक कहानी

ठाकुर का एक बेटा था, जो इस जगत को देख नहीं सकता था पर ठाकुर को उस परमात्मा पर विश्वास था..

जब काम न रहे तो - प्रेरक कहानी

एक आदमी ने एक भूत पकड़ लिया और उसे बेचने शहर गया, बस पाँच सौ रुपए है। मगर भूत तो भूत ही था। अपना मन ही वह भूत है..

मन की शांति कैसे प्राप्त करें? - प्रेरक कहानी

सेठ अमीरचंद के पास अपार धन दौलत थी। उसे हर तरह का आराम था, लेकिन उसके मन को शांति नहीं मिल पाती थी। हर पल उसे कोई न कोई चिंता परेशान किये रहती थी...

सच्चे देशभक्त की निष्ठा - प्रेरक कहानी

गुलजारीलाल नंदा को मकान मालिक ने किराया न दे पाने पर किराए के मकान से निकाल दिया। बूढ़े के पास एक पुराना बिस्तर, कुछ एल्युमीनियम के बर्तन, एक प्लास्टिक की बाल्टी और एक मग आदि के अलावा शायद ही कोई सामान था।

Om Jai Jagdish Hare Aarti - Om Jai Jagdish Hare Aarti
Shri Krishna Bhajan - Shri Krishna Bhajan
Bhakti Bharat APP