सीता नवमी | वट सावित्री व्रत | आज का भजन! | भक्ति भारत को फेसबुक पर फॉलो करें!

मुकुट सिर मोर का, मेरे चित चोर का।


मुकुट सिर मोर का, मेरे चित चोर का।
दो नैना सरकार के, कटीले हैं कटार से॥

कमल लज्जाये तेरे नैनो को देख के।
भूली घटाएँ तेरी कजरे की रेख पे।
यह मुखड़ा निहार के, सो चाँद गए हार के,
दो नैना सरकार के, कटीले हैं कटार से॥
॥ मुकुट सिर मोर का...॥

कुर्बान जाऊं तेरी बांकी अदाओं पे।
पास मेरे आजा तोहे भर मैं भर लूँ मैं बाहों में।
जमाने को विसार के, दिलो जान तोपे वार के,
दो नैना सरकार के, कटीले हैं कटार से॥
॥ मुकुट सिर मोर का...॥

रमण बिहारी नहीं तुलना तुम्हारी।
तुझ सा ना पहले कोई ना देखा अगाडी।
दीवानों ने विचार के, कहा यह पुकार के,
दो नैना सरकार के, कटीले हैं कटार से॥
॥ मुकुट सिर मोर का...॥

मुकुट सिर मोर का, मेरे चित चोर का।
दो नैना सरकार के, कटीले हैं कटार से॥


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