भगवान श्री गणेश ने अपने भक्तों के कल्याण तथा दैत्यों के विनाश के लिए अनेक अवतार धारण किए। मुद्गल पुराण में वर्णित है कि पुष्टिपति विनायक भगवान गणेश के दिव्य अवतारों में से एक हैं।
पुष्टिपति विनायक की कथा
प्राचीन काल में दुर्मति नामक एक असुर तीनों लोकों पर शासन करता था। उसने आदिशक्ति जगदंबा की कठोर तपस्या करके अपार शक्ति प्राप्त की थी। उस वरदान के प्रभाव से सभी देवता उसके सामने निर्बल हो गए थे।
दुर्मति ने कैलाश पर्वत पर आक्रमण किया और माता पार्वती पर भी अपनी दुष्ट दृष्टि डाली, जिन्होंने स्वयं उसे शक्ति प्रदान की थी। परिणामस्वरूप भगवान शिव और माता पार्वती को कैलाश छोड़ना पड़ा।
जब देवताओं के सभी प्रयास विफल हो गए, तब देवर्षि नारद ने भगवान शिव और माता पार्वती को श्री गणेश की उपासना करने का उपदेश दिया। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन भगवान गणेश की नई मिट्टी की प्रतिमा स्थापित करें, श्रद्धा से पूजा करें और सायंकाल उसका विसर्जन कर दें।
इस प्रकार निरंतर व्रत और पूजा करने के पश्चात वैशाख मास की पूर्णिमा के दिन भगवान श्री गणेश अपने अत्यंत विराट और दिव्य स्वरूप में शिव और पार्वती के समक्ष प्रकट हुए। उनके उस अद्भुत रूप को देखकर शिव और पार्वती भय एवं विस्मय से भर गए और उन्होंने प्रार्थना की कि वे बालक रूप में उनके साथ निवास करें।
भगवान गणेश ने उनकी प्रार्थना स्वीकार की और बाल स्वरूप धारण कर शिव-पार्वती के साथ रहने लगे। उसी समय भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पुत्री पुष्टि का जन्म हुआ। बाद में उनका विवाह भगवान गणेश से हुआ। इसी कारण इस अवतार में भगवान गणेश पुष्टिपति विनायक कहलाए, अर्थात “पुष्टि के स्वामी”। पुष्टिपति विनायक दिव्य ज्ञान, समृद्धि और आध्यात्मिक पोषण के प्रतीक माने जाते हैं।
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दुर्मति का वध
जब पुष्टिपति विनायक ने दुर्मति के अत्याचारों के विषय में सुना, तब उन्होंने पहले उसे प्रेमपूर्वक समझाने का प्रयास किया। भगवान विष्णु को भी दुर्मति के पास भेजा गया ताकि वह अपने दुष्ट स्वभाव का त्याग कर दे।
किन्तु दुर्मति ने भगवान गणेश को युद्ध की चुनौती दे दी।
दोनों के बीच भयंकर युद्ध आरंभ हुआ। दुर्मति ने भगवान गणेश पर एक बाण चलाया। भगवान गणेश ने उस बाण को अपने दाँत से रोक लिया, जिससे उनका एक दाँत टूट गया। तत्पश्चात उन्होंने उसी टूटे हुए दाँत को अस्त्र बनाकर दुर्मति पर प्रहार किया और उसका सिर धड़ से अलग कर दिया।
इस प्रकार भगवान गणेश ने समस्त लोकों को भय और अत्याचार से मुक्त किया। इसी कारण भगवान गणेश का टूटा हुआ दाँत त्याग, ज्ञान और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। जानिए
पुष्टिपति विनायक जयंती के बारे में।
पुष्टिपति विनायक से जुड़ी अन्य कथाएँ
❀ श्रीकृष्ण ने रुक्मिणी से विवाह के बाद विदर्भ के यवतमाल जिले के दरव्हा स्थित पुष्टिपति विनायक मंदिर में पूजा की थी।
❀ प्रसिद्ध स्यामंतक मणि कथा में भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी अंतर्ज्ञान शक्ति पुनः प्राप्त करने के लिए पुणे जिले के सुपे स्थित पुष्टिपति विनायक की आराधना की थी।
❀ पुष्टिपति विनायक की कृपा से शनिदेव की दृष्टि से उत्पन्न विनाशकारी श्राप का प्रभाव समाप्त हुआ था।
❀ एक अन्य कथा के अनुसार अगस्त्य ऋषि को पुष्टिपति विनायक के आशीर्वाद से समुद्र का जल पीने की शक्ति प्राप्त हुई, जिसके द्वारा उन्होंने समुद्र की गहराइयों में छिपे राक्षस वातापी का विनाश किया।