पितृ पक्ष - Pitru Paksha
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

बुरे समय में कृतज्ञता ना छोड़ें - प्रेरक कहानी (Bure Samay Mein Krtagyata Na Chhoden)


Add To Favorites Change Font Size
एक शिकारी ने शिकार पर तीर चलाया। तीर पर सबसे खतरनाक जहर लगा हुआ था। पर निशाना चूक गया और तीर शिकार की जगह एक फले-फूले पेड़ में जा लगा।
पेड़ में जहर फैला और वह सूखने लगा। उस पर रहने वाले सभी पक्षी एक-एक कर उसे छोड़ गए।

पेड़ के कोटर में एक धर्मात्मा तोता बहुत बरसों से रहा करता था। तोता पेड़ छोड़ कर नहीं गया, बल्कि अब तो वह ज्यादातर समय पेड़ पर ही रहता।

दाना-पानी न मिलने से तोता भी सूख कर कांटा हुआ जा रहा था।

बात देवराज इंद्र तक पहुंची। मरते वृक्ष के लिए अपने प्राण दे रहे तोते को देखने के लिए इंद्र स्वयं वहाँ आए। धर्मात्मा तोते ने उन्हें पहली नजर में ही पहचान लिया।

इंद्र देव ने कहा: देखो भाई इस पेड़ पर न पत्ते हैं, न फूल, न फल। अब इसके दोबारा हरे होने की कौन कहे, बचने की भी कोई उम्मीद नहीं है। जंगल में कई ऐसे पेड़ हैं, जिनके बड़े-बड़े कोटर पत्तों से ढके हैं। पेड़ फल-फूल से भी लदे हैं। वहां से सरोवर भी पास है। तुम इस पेड़ पर क्या कर रहे हो, वहाँ क्यों नहीं चले जाते?

तोते ने जवाब दिया: देवराज, मैं इसी पर जन्मा, इसी पर बड़ा हुआ, इसके मीठे फल खाए। इसने मुझे दुश्मनों से कई बार बचाया। इसके साथ मैंने सुख भोगे हैं। आज इस पर बुरा वक्त आया तो मैं अपने सुख के लिए इसे त्याग दूं ? जिसके साथ सुख भोगे, दुख भी उसके साथ भोगूंगा, मुझे इसमें आनंद है।

आप देवता होकर भी मुझे ऐसी बुरी सलाह क्यों दे रहे हैं? यह कह कर तोते ने तो इंद्र देव को जबाब दिया।

तोते की दो-टूक सुन कर इंद्र प्रसन्न हुए, बोल: मैं तुमसे प्रसन्न हूँ, कोई वर मांग लो।

तोता बोला: मेरे इस प्यारे पेड़ को पहले की तरह ही हरा-भरा कर दीजिए।

देवराज ने पेड़ को न सिर्फ अमृत से सींच दिया, बल्कि उस पर अमृत बरसाया भी। पेड़ में नई कोंपलें फूटीं। वह पहले की तरह हरा हो गया, उसमें खूब फल भी लग गए। तोता उस पर बहुत दिनों तक रहा, मरने के बाद देवलोक को चला गया।

बुरे वक्त में व्यक्ति भावनात्मक रूप से कमजोर हो जाता है। जो उस समय उसका साथ देता है, उसके लिए वह अपने प्राणों की बाजी लगा देता है। किसी के सुख के साथी बनो न बनो, दुःख के साथी जरूर बनो।
यह भी जानें

Prerak-kahani Shikari Prerak-kahaniHunter Prerak-kahaniIndradev Prerak-kahaniIndra Prerak-kahaniTree Prerak-kahaniTota Prerak-kahaniParrot Prerak-kahaniDharmatma Tota Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें।

Latest Prerak-kahani ›

जब वैश्या ने कबीरदास जी की झोपड़ी में लगाई आग - प्रेरक प्रसंग

सतगुरु कबीरदास जी की कुटिया के पास एक वैश्या ने अपना कोठा बना लिया, एक ओर तो कबीरदास जी जो दिन भर मालिक के नाम कीर्तन करते और दूसरी और वैश्या जिसके घर में नाच गाना होता रहता

बाँके बिहारी जी का प्रेम - प्रेरक कहानी

एक बार मैं ट्रेन से आ रहा था मेरी साथ वाली सीट पे एक वृद्ध औरत बैठी थी जो लगातार रो रही थी...
मैंने बार बार पूछा मईया क्या हुआ, मईया क्या हुआ?

सच्चे मन, लगन से ही लक्ष्य की प्राप्ति - प्रेरक कहानी

गंगा जी के मार्ग में जहृु ऋषि की कुटिया आयी तो धारा ने उसे बहा दिया। क्रोधित हुए मुनि ने योग शक्ति से धारा को रोक दिया।...

दया करते समय व्यापर मत करो - प्रेरक कहानी

हमेशा की तरह दोपहर को सब्जीवाली दरवाजे पर आई और चिल्लाई, चाची- आपको सब्जियां लेनी हैं?
माँ हमेशा की तरह अंदर से चिल्लाई- सब्जियों में क्या-क्या है?
सब्जीवाली- ग्वार, पालक, भिन्डी, आलू, टमाटर

व्यक्ति की पहचान, व्यवहार और नियत से है - प्रेरक कहानी

आदतें असलियत का पता बता देती हैं... एक राजा के दरबार मे एक अजनबी इंसान नौकरी माँगने के लिए आया।

प्रेरणादायक महाराजा रणजीत सिंह की कहानियाँ

एक बार महाराजा कहीं जा रहे थे, तभी उनके माथे पर पत्थर आकार लगा। उनके माथे पर से खून बहने लगा।...

श्री गणेश एवं बुढ़िया माई की कहानी

एक बुढ़िया माई थी। मिट्टी के गणेश जी की पूजा करती थी। रोज बनाए रोज गल जाए। एक सेठ का मकान बन रहा था..

Navratri Specials 2026 - Navratri Specials 2026
Ganesh Aarti Bhajan - Ganesh Aarti Bhajan
Bhakti Bharat APP