आजु होरी है होरी है आजु होरी है।
रंग बिरंग रंग पिचकारिन, अंग अंग रँग बोरी है।
जोइ देखत सोइ हँसत कहत अस, इन्द्र धनुष छवि चोरी है।
इकटक लखतहुँ जानि सकत नहिं, को छोरा को छोरी है।
सबै दिवाने मनमाने जनु, पिये भंग रस घोरी है।
भक्तिभारत लिरिक्स
हमहुँ 'कृपालु' उच्च स्वर सों कह, सखन सखिन सँग होरी है।
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