महालक्ष्मी मंत्र - ॐ महालक्ष्मयै नमो नमः (Malakshmi Mantra - Om Mahalaxmi Namoh Namah)


ॐ महालक्ष्म्यै नमो नमः
ॐ महालक्ष्म्यै नमो नमः
ॐ महालक्ष्म्यै नमो नमः
ॐ महालक्ष्म्यै नमो नमः
ॐ महालक्ष्म्यै नमो नमः
ॐ महालक्ष्म्यै नमो नमः
ॐ महालक्ष्म्यै नमो नमः
ॐ महालक्ष्म्यै नमो नमः

ॐ महालक्ष्म्यै नमो नमः जाप

ॐ महालक्ष्म्यै नमो नमः
ॐ विष्णु प्रियायै नमो नमः
ॐ धनप्रदायै नमो नमः
ॐ विश्व जनन्यै नमो नमः

ॐ महालक्ष्म्यै नमो नमः
ॐ विष्णु प्रियायै नमो नमः
ॐ धनप्रदायै नमो नमः
ॐ विश्व जनन्यै नमो नमः
नवरात्रि 2025 की तारीखें
Navratri 2025 Dates
दिन तिथि नवरात्रि में देवी के नाम रँग
30 मार्च प्रतिपदा माता शैलपुत्री पूजा, नवरात्रि घटस्थापना, नववर्ष, चेटी चंड नारंगी
31 मार्च द्वितीया माता ब्रह्मचारिणी पूजा सफ़ेद
माता चंद्रघंटा पूजा, मत्स्य जयन्ती, गणगौर
1 अप्रैल चतुर्थी माता कुष्मांडा पूजा लाल
2 अप्रैल पंचमी माता स्कंद माता पूजा, लक्ष्मी पंचमी गहरा नीला
3 अप्रैल षष्ठी माता कात्यायनी पूजा पीला
4 अप्रैल सप्तमी माता कालरात्रि पूजा हरा
5 अप्रैल अष्टमी महा गौरी पूजा स्लेटी
6 अप्रैल नवमी राम नवमी, माता सिद्धिदात्री पूजा, स्वामीनारायण जयंती बैंगनी
7 अप्रैल दशमी नवरात्रि व्रत समाप्त।
Malakshmi Mantra - Om Mahalaxmi Namoh Namah - Read in English
Om Mahalakshmei Namo Namah, Vishnu Priyayei Namo Namah, Om Dhanpradayei Namo Namah...
Mantra Diwali MantraMata Lakshmi MantraLaxmi MantraLaxmi Pujan MantraNavratri MantraKojagari Vrat MantraKannada MantraSinger Aishwarya Srinivas MantraSouth Indian Mantra
अगर आपको यह मंत्र पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!


* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

मंत्र ›

बृहस्पति स्तोत्र

पीताम्बर: पीतवपु: किरीटी, चतुर्भुजो देवगुरु: प्रशान्त: । दधाति दण्डं च कमण्डलुं च..

ॐ श्री विष्णु मंत्र: मङ्गलम् भगवान विष्णुः

ॐ नमोः भगवते वासुदेवाय॥ शान्ताकारम् भुजगशयनम्... मङ्गलम् भगवान विष्णुः...

श्री गणेशपञ्चरत्नम् - मुदाकरात्तमोदकं

मुदाकरात्तमोदकं सदा विमुक्तिसाधकं, कलाधरावतंसकं विलासिलोकरक्षकम् । अनायकैकनायकं विनाशितेभदैत्यकं...

वक्रतुण्ड महाकाय - गणेश मंत्र

वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥

गणपति स्तोत्रम्

जेतुं यस्त्रिपुरं हरेणहरिणा व्याजाद्बलिं बध्नता, स्रष्टुं वारिभवोद्भवेनभुवनं शेषेण धर्तुं धराम्।