चिट्ठी लिखी है मैंने, आँसुओं की स्याही से,
पहुँचा देना संदेशा मेरा, किसी राही से।
मैया... ओ मैया...
मुझे दर पे बुला ले एक बार, तरस गया देखने को,
तेरा ऊँचा-ऊँचा द्वार, तरस गया देखने को।
मुझे दर पे बुला ले एक बार...
मित्तल जी वाला हक और शिकायत भाव]
सब जाते हैं तेरे दर पे, मैं ही क्यों रह जाता हूँ?
सबको मिलता प्यार तेरा, मैं ही क्यों पछताता हूँ?
क्या भूल हुई मुझसे माँ, या खोट है मेरी भक्ति में?
मैया क्या कमी रह गई, तेरे दाती होने की शक्ति में?
भक्तिभारत लिरिक्स
गली-गली में लोग अब, ताने मार के पूछते हैं,
कब जाएगी तेरी अर्जी?— ये कह कर मुझे टोकते हैं।
मैया... ओ मैया...
अब लाज बचा ले एक बार, तरस गया देखने को,
तेरा ऊँचा-ऊँचा द्वार, तरस गया देखने को।
चंचल जी वाला ममता भाव]
मैं बालक हूँ नादान माँ, तू ममता की सागर है,
मेरे पापों का घड़ा भरा, तू दया की गागर है।
जैसे चंचल को तूने तारा, वैसे मुझे भी तार दे,
एक बार अपने इस बच्चे के, सर पे हाथ तू धार दे।
मुझे सोने का महल नहीं चाहिए, ना चाँदी की दीवारें,
मैया मुझे तो चाहिए बस, तेरे भवन की ठंडी फुहारें।
मैया... ओ मैया...
मुझे चरणों में लगा ले एक बार, तरस गया देखने को,
तेरा ऊँचा-ऊँचा द्वार, तरस गया देखने को।
जोश भरा क्लाइमेक्स - मित्तल स्टाइल]
अब रुकना नहीं है, अब झुकना नहीं है,
माँ ने बुलाया है, अब थकना नहीं है।
भक्तों की टोली देखो, जयकारे लगा रही है,
पहाड़ों की वो ठंडी हवा, मुझे पास बुला रही है।
मित्तल कहे माँ का द्वार, कभी ना छोड़ना,
किसी और से तुम अपना, नाता ना जोड़ना।
मैया... ओ मैया...
बेड़ा पार लगा दे एक बार, तरस गया देखने को,
तेरा ऊँचा-ऊँचा द्वार, तरस गया देखने को।
(सब हाथ उठा कर बोलो...)
पहाड़ांवाली... जय माता दी!
मेहरांवाली... जय माता दी!
लाटांवाली... जय माता दी!
शेरावाली... जय माता दी!
जय माता दी... जय माता दी... जय माता दी!