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स्वस्ति / स्वस्तिक मंत्र (Swasti Mantra Or Swastivachan)


स्वस्ति / स्वस्तिक मंत्र
स्वस्ति मन्त्र शुभ और शांति के लिए प्रयुक्त होता है। स्वस्ति = सु + अस्ति = कल्याण हो। ऐसा माना जाता है कि इससे हृदय और मन मिल जाते हैं। स्वस्ति मन्त्र का पाठ करने की क्रिया स्वस्तिवाचन कहलाती है।
ॐ स्वस्ति न इन्द्रो वृद्धश्रवाः।
स्वस्ति नः पूषा विश्ववेदाः।
स्वस्ति नस्तार्क्ष्यो अरिष्टनेमिः।
स्वस्ति नो बृहस्पतिर्दधातु ॥
ॐ शान्तिः शान्तिः शान्तिः ॥

हिन्दी भावार्थ:
महान कीर्ति वाले इन्द्र हमारा कल्याण करो, विश्व के ज्ञानस्वरूप पूषादेव हमारा कल्याण करो। जिसका हथियार अटूट है ऐसे गरुड़ भगवान हमारा मंगल करो। बृहस्पति हमारा मंगल करो।
नवरात्रि 2026 की तारीखें
Navratri 2026 Dates
दिन तिथि देवी पूजा / उत्सव रँग
11 अक्टूबर प्रतिपदा घटस्थापना, माता शैलपुत्री पूजा, अग्रसेन जयंती नारंगी
12 अक्टूबर द्वितीया माँ ब्रह्मचारिणी पूजा सफ़ेद
13 अक्टूबर तृतीया माँ चंद्रघंटा पूजा, सिन्दूर तृतीया लाल
14 अक्टूबर चतुर्थी माँ कुष्मांडा पूजा गहरा नीला
15 अक्टूबर पंचमी माँ स्कंद माता पूजा, ललिता पञ्चमी पीला
16 अक्टूबर षष्ठी माँ कात्यायनी पूजा, सरस्वती आवाहन | दुर्गा पूजा (बिल्व निमन्त्रण, कल्पारम्भ, अकाल बोधन) हरा
17 अक्टूबर सप्तमी माँ कालरात्रि पूजा, सरस्वती पूजा | दुर्गा पूजा (नवपत्रिका पूजा, कलाबोऊ पूजा) स्लेटी
18 अक्टूबर सप्तमी दुर्गा पूजा बैंगनी
19 अक्टूबर अष्टमी माँ महागौरी पूजा, दुर्गा अष्टमी | दुर्गा पूजा (दुर्गा अष्टमी, कुमारी पूजा, सन्धि पूजा, महा नवमी) मोर हरा
20 अक्टूबर नवमी माँ सिद्धिदात्री पूजा, नवमी हवन, विजयदशमी, नवरात्रि पारण | दुर्गा पूजा (बंगाल महा नवमी, दुर्गा बलिदान, नवमी हवन, दुर्गा विसर्जन) -
21 अक्टूबर दशमी दुर्गा पूजा (बंगाल दुर्गा विसर्जन, बंगाल विजयादशमी, सिन्दूर उत्सव) -

Swasti Mantra Or Swastivachan in English

Om Swasti Na Indro Vridhashravah. Swasti Naah Pusha Vishwavedaah. Swasti Nastarkshyo Arishtanemih.
यह भी जानें

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मंत्र ›

श्री अष्टलक्ष्मी स्तोत्रम

सुमनस वन्दित सुन्दरि माधवि, चन्द्र सहोदरि हेममये, मुनिगण वन्दित मोक्षप्रदायिनि, मंजुल भाषिणी वेदनुते ।

आदित्य-हृदय स्तोत्र

ततो युद्धपरिश्रान्तं समरे चिन्तया स्थितम् । रावणं चाग्रतो दृष्टवा युद्धाय समुपस्थितम् ॥ दैवतैश्च समागम्य द्रष्टुमभ्यागतो रणम् ।

दामोदर अष्टकम

नमामीश्वरं सच्-चिद्-आनन्द-रूपं, लसत्-कुण्डलं गोकुले भ्राजमनम्य, शोदा-भियोलूखलाद् धावमानं

श्री हनुमान स्तवन - श्रीहनुमन्नमस्कारः

प्रनवउँ पवनकुमार खल बन पावक ज्ञानघन ।.. गोष्पदी कृत वारीशं मशकी कृत राक्षसम् ।..

संकट मोचन हनुमानाष्टक

बाल समय रवि भक्षी लियो तब।.. लाल देह लाली लसे, अरु धरि लाल लंगूर।...

दशरथकृत शनि स्तोत्र

नम: कृष्णाय नीलाय शितिकण्ठ निभाय च। नम: कालाग्निरूपाय कृतान्ताय च वै नम:॥

श्री महालक्ष्मी अष्टक

नमस्तेस्तू महामाये श्रीपिठे सूरपुजिते । शंख चक्र गदा हस्ते महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥

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