नवरात्रि विशेष 2026 - Navratri Specials 2026
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

करोड़ों की दौड़ खोया हुआ सुकून - प्रेरक कहानी (Caror Ki Daud Me Khoya Sukoon)


Add To Favorites Change Font Size
दिल्ली के एक छोटे से मोहल्ले में सोहन नाम का एक युवक रहता था। उसके पिता रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे और उसकी माँ घरों में काम करती थीं। घर की आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी, लेकिन सोहन के सपने बहुत बड़े थे। वह चाहता था कि एक दिन वह इतना सफल बने कि उसके परिवार को कभी किसी चीज़ की कमी न रहे।
हर रविवार सोहन एक सामाजिक सेवा संस्था में जाकर निःस्वार्थ भाव से काम करता था। वहाँ एक अनुभवी और आदरणीय मार्गदर्शक, विवेक जी, युवाओं को जीवन के मूल्य और सफलता का सही अर्थ समझाते थे।
सोहन अक्सर उनसे कहता- सर, मुझे आशीर्वाद दीजिए कि मैं बहुत बड़ा बिज़नेसमैन बनूँ, खूब पैसा कमाऊँ और अपने परिवार की सारी परेशानियाँ दूर कर दूँ।
एक दिन विवेक जी ने मुस्कुराते हुए पूछा- सोहन, क्या तुम यहाँ सेवा केवल अमीर बनने की इच्छा से करते हो?
सोहन ने बिना किसी झिझक के उत्तर दिया- जी सर। मैं गरीबी से तंग आ चुका हूँ। मेरी सबसे बड़ी इच्छा यही है कि मैं बहुत धन कमाऊँ और अपने परिवार को हर सुख दूँ।
विवेक जी ने शांत स्वर में कहा- मेहनत करते रहो। अवसर अवश्य मिलेगा। लेकिन याद रखना, जब सफलता मिले तो अपने जीवन का संतुलन कभी मत खोना।

समय बीतता गया। सोहन ने एक छोटासा ऑनलाइन व्यापार शुरू किया। उसने दिन-रात मेहनत की, नई-नई बातें सीखीं और कभी हार नहीं मानी। धीरे-धीरे उसका व्यापार बढ़ता गया। कुछ ही वर्षों में उसकी कंपनी करोड़ों रुपये की हो गई। अब उसके पास आलीशान घर, महँगी गाड़ियाँ, नाम, प्रतिष्ठा और अपार धन था।

लेकिन सफलता की इस दौड़ में उसने बहुत कुछ खो दिया था। माता-पिता के साथ बैठकर बातें करने का समय नहीं था। पुराने मित्र दूर हो गए। समाज सेवा पूरी तरह छूट गई। सुबह से रात तक केवल मीटिंग, मोबाइल और व्यापार ही उसकी दुनिया बन गए। एक रात देर तक काम करते हुए अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई। डॉक्टर ने जाँच के बाद कहा- आपके शरीर से ज़्यादा आपका मन थक चुका है। आपको आराम, परिवार और मानसिक शांति की आवश्यकता है।

डॉक्टर की बात सुनते ही सोहन को वर्षों पहले विवेक जी की सीख याद आ गई। अगले ही रविवार वह उसी सेवा संस्था पहुँचा। वहाँ सब कुछ पहले जैसा ही था। उसने बिना कुछ कहे झाड़ू उठाई और पूरे मन से सफ़ाई करने लगा। कुछ देर बाद विवेक जी वहाँ आए।

उन्होंने मुस्कुराकर पूछा- कैसे हो सोहन? सुना है अब तुम बहुत बड़े उद्योगपति बन गए हो।
सोहन की आँखें भर आईं। वह बोला- सर, मैंने वह सब पा लिया जिसके लिए कभी आपके पास आता था। धन मिला, सम्मान मिला, सफलता मिली, लेकिन मन का सुकून कहीं खो गया। अब समझ आया कि सबसे बड़ी गरीबी पैसों की नहीं, बल्कि मन की शांति की होती है।
विवेक जी मुस्कुराए और बोले- बेटा, तुमने मुझसे सफलता माँगी थी, शांति नहीं। इसलिए तुम्हें वही मिला जो तुमने माँगा था।

यह सुनकर सोहन भावुक हो गया। वह विवेक जी के चरणों में बैठ गया और बोला- सर, अब मुझे धन, प्रसिद्धि या कोई और इच्छा नहीं चाहिए। बस मुझे फिर से सेवा करने दीजिए। इस बार किसी स्वार्थ के लिए नहीं, बल्कि अपने मन की शांति के लिए।
विवेक जी ने उसके कंधे पर हाथ रखते हुए कहा- याद रखना, जो सेवा किसी स्वार्थ से की जाती है, उसका फल सीमित होता है। लेकिन जो सेवा निःस्वार्थ भाव से की जाती है, वही मन को सच्ची शांति देती है। पैसा जीवन को सुविधाएँ दे सकता है, पर मन की शांति, परिवार का प्रेम और दूसरों के लिए जीने का आनंद केवल सेवा और संतुलित जीवन से मिलता है।

उस दिन के बाद सोहन ने अपने जीवन की दिशा बदल दी। उसने व्यापार जारी रखा, लेकिन परिवार के लिए समय निकालना शुरू किया। हर सप्ताह समाज सेवा करने लगा, गरीब बच्चों की शिक्षा का खर्च उठाया और अपने कर्मचारियों के जीवन को बेहतर बनाने का संकल्प लिया। धीरे-धीरे उसके चेहरे पर वही मुस्कान लौट आई, जिसे करोड़ों रुपये भी कभी नहीं खरीद सके थे।

धन कमाना गलत नहीं है, लेकिन यदि धन कमाने की दौड़ में मन की शांति, परिवार, रिश्ते और सेवा-भाव खो जाएँ, तो वह सफलता अधूरी है। सच्चा सुख निःस्वार्थ सेवा, संतोष और जीवन के संतुलन में ही छिपा है।
यह भी जानें

Prerak-kahani Shanti Prerak-kahaniPeace Prerak-kahaniSukoon Prerak-kahaniPoor Boy Prerak-kahaniGarib Prerak-kahani

अगर आपको यह prerak-kahani पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस prerak-kahani को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें।

Latest Prerak-kahani ›

करोड़ों की दौड़ खोया हुआ सुकून - प्रेरक कहानी

दिल्ली के एक छोटे से मोहल्ले में सोहन नाम का एक युवक रहता था। उसके पिता रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे..

एक छोटी सी मदद - प्रेरक कहानी

शनिवार की रात लगभग साढ़े ग्यारह बजे जय कार्यालय से घर लौट रहा था। कुछ दूर जाने पर उसे सड़क किनारे एक युवती दिखाई दी..

सिद्धियों का उचित प्रयोग ही करें - प्रेरक कहानी

चार विद्वान ब्राह्मण मित्र थे। एक दिन चारों ने संपूर्ण देश का भ्रमण कर हर प्रकार का ज्ञान अर्जित करने का निश्चय किया।...

जीवन का, जीवन बीमा - प्रेरक कहानी

दो मित्र थे, बड़े परिश्रमी और मेहनती। अपने परिश्रम से दोनों एक दिन बड़े सेठ बन गए। दोनों ने बड़ा व्यवसाय खड़ा कर लिया। पहले सेठ ने अपनी सारी संपत्ति का बीमा करवा लिया।...

दो बहते पत्तों की कहानी - प्रेरक कहानी

एक समय की बात है, गंगा नदी के किनारे पीपल का एक पेड़ था। पहाड़ों से उतरती गंगा पूरे वेग से बह रही थी कि अचानक पेड़ से दो पत्ते नदी में आ गिरे।

मृत्यु एक अटल सत्य हैं - प्रेरक कहानी

कृष्ण ने कहा: तुम्हे! किसी एक घर से मुट्ठी भर ज्वार लानी होगी और ध्यान रखना होगा कि उस परिवार में कभी किसी की मृत्यु न हुई हो..

एक छोटी सी अच्छी आदत - प्रेरक कहानी

पुराने समय में दो दोस्त थे। बचपन में दोनों साथ पढ़ते और खेलते थे। पढ़ाई पूरी होने के बाद दोनों दोस्त अपने अपने जीवन में व्यस्त हो गए।

Navratri Specials 2026 - Navratri Specials 2026
Ganesh Aarti Bhajan - Ganesh Aarti Bhajan
Bhakti Bharat APP