Haanuman Bhajan
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मंदिर के शिखर दर्शन का महत्व

मंदिर में दर्शन के कई नियम हैं और उनका पालन करना जरूरी है। साथ ही यह भी माना जाता है कि यदि आप किसी कारण से मंदिर के अंदर प्रवेश नहीं कर सकते हैं, तो आपको बाहर से इसके शिखर के दर्शन अवश्य करने चाहिए।

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अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता का क्या अर्थ है?

भगवान श्री राम के प्रिय भक्त प्रभु हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधि के दाता के रूप में जाना जाता है। हनुमान चालीसा की एक चौपाई भी है “अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता अस बर दीन जानकी माता”। अर्थात हनुमान जी की भक्ति से व्यक्ति के जीवन में आठ प्रकार की सिद्धियाँ और नौ प्रकार की निधियाँ प्राप्त होती हैं।

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पूजा और व्रत में क्यों नहीं किया जाता प्याज और लहसुन का इस्तेमाल?

हमारे हिंदू धर्म में कई मान्यताएं प्रचलित हैं, जिनका हम पालन भी करते हैं। शास्त्रों के अनुसार खासतौर पर प्याज और लहसुन भगवान को चढ़ाने की मनाही है। यह जानते हुए भी कि प्याज-लहसुन गुणों की खान है, लेकिन इसके बाद भी व्रत में बनने वाले किसी भी तरह के खाने में प्याज-लहसुन का इस्तेमाल नहीं किया जाता है।

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सप्त पुरी: हिंदुओं की सात पवित्र शहर

हिंदुओं के पवित्र ग्रंथों के अनुसार भारत बर्ष मैं सप्त पुरी नामक सात पवित्र शहर हैं, प्रत्येक शहर का हिंदू देवताओं के साथ एक मजबूत संबंध है। इन सात पवित्र शहर में आपको मोक्ष प्राप्त करने के लिए जाना चाहिए।

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ब्रम्हा मुहूर्त क्या होता है?

वेदों में ब्रह्म मुहूर्त को बहुत महत्वपूर्ण माना गया है। शास्त्रों में बताया गया है कि ब्रह्म मुहूर्त में निद्रा त्यागने से विद्या, बुद्दि, स्वास्थ्य और बल प्राप्त होते हैं। किसी भी काम ब्रह्म मुहूर्त में शुरू करना बहुत उत्तम माना गया है।

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साहिब बंदगी: एक आध्यात्मिक संगठन

साहिब बंदगी सतगुरु मधु परमहंस द्वारा स्थापित एक आध्यात्मिक संगठन है। सतगुरु मधु परमहंस एक भारतीय आध्यात्मिक गुरु और भारतीय सेना में पूर्व जूनियर आयुक्त अधिकारी थे।

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भगवान जगन्नाथ का नीलाद्रि बीजे अनुष्ठान क्या है?

नीलाद्रि बीजे, वार्षिक रथ यात्रा उत्सव के अंत और भगवान जगन्नाथ की गर्भगृह में वापसी को चिह्नित करता है या फिर आप भगवान जगन्नाथ और उनकी प्यारी पत्नी माँ महालक्ष्मी के बीच एक प्यारी सी कहानी बता सकते हैं।

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देवघर के आस-पास घूमने की सबसे अच्छी जगह

अगर आप देवघर जाने की योजना बना रहे हैं तो बाबा बैद्यनाथ के मुख्य मंदिर के अलावा आप देवघर में और भी बहुत कुछ देख सकते हैं। शिवगंगा | त्रिकूट पर्वत | नंदन पहाड़ी | सत्संग आश्रम | नौलखा मंदिर | तपोवन | रिखियापीठ आश्रम | हरिला जोरिक | श्रीनिवास आंगन | देवसंगा मठ

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समाधि क्या है? भू-समाधि और जल-समाधि में अंतर बताइए?

हिंदू धार्मिक परंपराओं में संत या गुरु के रूप में माने जाने वाले लोगों को सम्मानित करने के लिए समाधि स्थलों को अक्सर इस तरह से बनाया जाता है, जिसमें कहा जाता है कि ऐसी आत्माएं महा समाधि में चली गई थीं, या मृत्यु के समय पहले से ही समाधि में थीं।

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भगवान जगन्नाथ के अलग-अलग बेश?

बेश एक संस्कृत शब्द है, जिसका अर्थ है पोशाक, पोशाक या पहनावा। 'मंगला अलाती' से 'रात्रि पहुड़' तक प्रतिदिन, पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर की 'रत्नवेदी' पर देवताओं को सूती और रेशमी कपड़ों, कीमती पत्थरों से जड़े सोने के आभूषणों, कई प्रकार के फूलों और अन्य पत्तियों और जड़ी-बूटियों से सजाया जाता है। जैसे तुलसी, दयान, मरुआ आदि। चंदन का लेप, कपूर और कभी-कभी कीमती कस्तूरी का उपयोग दैनिक और आवधिक अनुष्ठानों में किया जाता रहा है।

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भगवान अलारनाथ की कहानी: श्री जगन्नाथ कथा

अनासार के दौरान जब भगवान जगन्नाथ बीमार हो जाते हैं, तब अलारनाथ मंदिर परिसर मे भगवान को खीर का भोग लगाया जाता है तथा साथ ही साथ भक्तों को भी यही भोग भेंट किया जाता है।

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क्यों महाप्रभु एक दिन में मौसी माँ के घर नहीं पहुँच पाते?

धार्मिक परंपरा, रीति-रिवाजों के महत्व और व्यावहारिक कारणों से पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा आमतौर पर एक दिन में गुंडिचा मंदिर नहीं पहुँचती है।

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पुरी जगन्नाथ रथ यात्रा के तीन रथ

रथ यात्रा भगवान जगन्नाथ, बलदेव और सुभद्रा का वार्षिक रथ उत्सव है। वे तीन अलग-अलग रथों पर यात्रा करते हैं और लाखों लोग रथ खींचने के लिए इकट्ठा होते हैं।

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पुरी रथ यात्रा से जुड़े 10 कम ज्ञात और रोचक तथ्य

पुरी रथ यात्रा विश्व के सबसे प्राचीन और विशाल धार्मिक उत्सवों में से एक है। हर वर्ष लाखों श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और देवी सुभद्रा के दिव्य रथों के दर्शन करने के लिए पुरी पहुँचते हैं।

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पुरी जगन्नाथ के गुंडिचा रानी और नाकचणा कथा

श्रीगुंडिचा मंदिर की दीवार के सामने दो द्वार हैं। एक 'सिंहद्वार' और दूसरा 'नाकचणा द्वार'। 'श्रीगुंडिचायात्रा' के दिन मंदिर के सिंहद्वार से तीन रथ निकलते हैं और गुंडिचा मंदिर के सिंहद्वार की ओर बढ़ते हैं।

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