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नीलाम्बुजश्यामलकोमलाङ्गं (Neelambuj Shyamal Komalangam)


नीलाम्बुजश्यामलकोमलाङ्गं
नीलाम्बुजश्यामलकोमलाङ्गं सीतासमारोपितवामभागम्।
पाणौ महासायकचारुचापं नमामि रामं रघुवंशनाथम्॥
भावार्थ:
नील कमल के सामान श्यामल, सुन्दर, सांवले और कोमल अंग वाले। जिन के बाई ओर सीता माता विराजमान हो कर के इस दृश्य को और भी सुशोभित करती है।

जिन के दोनों हाथो में अमोघ धनुष और बाण इस प्रिये छबी को और भी निखारते है . उन रघु कुल के शिरोमणि को हम नमस्कार करते है , प्रणाम करते है।

यह अयोध्या कांड का तीसरा श्लोक है। बहुत से लोग रामायण प्रचार से पहले इस सुंदर श्लोक का पाठ करना पसंद करते हैं। जब आप श्री राम कथा सुनाते हैं या इस श्लोक का पाठ सुनते हैं, तो उम्मीद है कि इसे समझना थोड़ा आसान हो जाता है।

Neelambuj Shyamal Komalangam in English

Neelambuj Shyaamal Komal Aangam Sita Samaro Pita Vaam Bhaagam
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