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भजन: अमृत बेला गया आलसी सो रहा बन आभागा ! (Bhajan: Amrit Bela Geya Aalasi So Raha Ban Aabhaga)


भजन: अमृत बेला गया आलसी सो रहा बन आभागा !
बेला अमृत गया,
आलसी सो रहा बन आभागा,
साथी सारे जगे, तू न जागा,
बेला अमृत गया,
आलसी सो रहा, बन आभागा,
साथी सारे जगे, तू न जागा,
झोलियाँ भर रहै भाग्य वाले,
लाख पतितो ने जीवन सम्भाले,
रंक राजा बने, प्रभु रस में सने, कष्ट भागा,
साथी सारे जगे, तू न जागा,
॥ बेला अमृत गया...॥

प्रभु कृपा से नर तन यह पाया,
आलसी बनकर यूँ ही गँवाया
उल्टी हो गई मती,
कर ली अपनी छती, चोला त्यागा,
साथी सारे जगे, तू न जागा,
॥ बेला अमृत गया...॥

स्वास एक एक अनमोल बीता,
अमृत के बदले विष को तू पीता,
सौदा घाटे का कर,
हाथ माथे पे धर, रोने लगा,
साथी सारे जगे, तू न जागा,
॥ बेला अमृत गया...॥

मानव कुछ भी न तूने बिचारा,
सिर से ऋषियो का ऋण न उतारा,
गुरु का नाम न लिया,
गंदा पानी पीया, बन के कागा,
साथी सारे जगे, तू न जागा,
॥ बेला अमृत गया...॥

बेला अमृत गया,
आलसी सो रहा, बन आभागा,
साथी सारे जगे, तू न जागा,

Bhajan: Amrit Bela Geya Aalasi So Raha Ban Aabhaga in English

Bela Amrit Gaya, Aalsi so Raha, Ban Abhaga, Sathi Sare Jage, Tu Na Jaga...
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