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शिव भो शंम्भो शिव शम्भो स्वयंभो - मंत्र (Bho Shambho Shiva Shambho Swayambho)


शिव भो शंम्भो शिव शम्भो स्वयंभो - मंत्र
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शिव भो शंम्भो शिव शम्भो स्वयंभो
भो शम्भो शिव शम्भो स्वयंभो
गङ्गाधर शंकर करुणाकर मामव भवसागर तारक

निर्गुण परब्रह्म स्वरुप गमगम भूत प्रपञ्चा रहित
निज गुहानिहित नितान्त अनन्त आनन्द अतिशय अक्सयलिङ्ग

धिमित धिमित धिमि धिमिकित किततों तों तों तरिकित तरिकितकित तों
मातङ्ग मुनिवर वन्दिता इष सर्व दिगंबर वेस्तित
वेस इष सबेष नित्य निरञ्जन नित्य न अतेष इष सबेष सर्वेश
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मंत्र ›

श्री महालक्ष्मी अष्टक

नमस्तेस्तू महामाये श्रीपिठे सूरपुजिते । शंख चक्र गदा हस्ते महालक्ष्मी नमोस्तूते ॥

देवी तारा की अष्टोत्तर शतनामावली

ॐ तारिण्यै नमः। ॐ तरलायै नमः। ॐ तन्व्यै नमः।

बगलामुखी अष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम्, नारद-विष्णुसंवादे

श्रीबगलाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रम् ॥ श्रीगणेशाय नमः । नारद उवाच । भगवन्देवदेवेश सृष्टिस्थितिलयात्मक । शतमष्टोत्तरं नाम्नां बगलाया वदाधुना ॥ श्रीविष्णुयामले नारदविष्णुसंवादे श्रीबगलाष्टोत्तरशतनामस्तोत्रं

माँ बगलामुखी 108 नाम

ॐ बगलायै नमः। ॐ विष्णुवनितायै नमः। ॐ विष्णुशङ्करभामिन्यै नमः। ॐ बहुलायै नमः। ॐ वेदमात्रे नमः।

बगलामुखी मन्त्र

एकाक्षरी बगलामुखी मन्त्र | 1 अक्षर वाला मन्त्र | त्र्यक्षर बगलामुखी मन्त्र | 3 अक्षरों वाला मन्त्र | चतुराक्षर बगलामुखी मन्त्र | 4 अक्षरों वाला मन्त्र | बगलामुखी गायत्री मन्त्र

सप्तश्लोकी दुर्गा स्तोत्रम्

॥ अथ सप्तश्लोकी दुर्गा ॥ शिव उवाच - देवि त्वं भक्तसुलभे सर्वकार्यविधायिनी । कलौ हि कार्यसिद्ध्यर्थमुपायं ब्रूहि यत्नतः ॥

अथ मूर्तिरहस्यम्

ॐ नन्दा भगवती नाम या भविष्यति नन्दजा। स्तुता सा पूजिता भक्त्या वशीकुर्याज्जगत्त्रयम्॥1॥

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