Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

दीपावली पूजा मंत्र (Deepawali Puja Mantras)


1. गोवत्स द्वादशी मंत्र
अर्घ्य मंत्र
क्षीरोदार्नवसंभूते सुरासुरनमस्कृते।
सर्वदेवमये मातर्गृहाण्घ्यं नमो नमः॥

निवेदन मंत्र
गोवत्स द्वादशी निवेदन मंत्र

सुरभि त्वं जगन्मातरदेवी विष्णुपदे स्थिता।
सर्वदेवमये ग्रसं मया दत्तमिदं ग्रसा॥

प्रार्थना मंत्र
सर्वदेवमये देवि सर्वदेवैरलंकृते।
मातरमाभिलाषितं सफलं कुरु नंदिनी॥

मन्त्र अर्थ - हे समस्त देवताओं द्वारा अलङ्कृत माता! नन्दिनी! मेरा मनोरथ पुर्ण करो।

2. यमदीप मंत्र
मृत्युना पाषादण्डभ्यं कालेन श्यामया सहः।
त्रयोदश्यां दीपदानत्सुर्यजः प्रियतम मम॥

मंत्र अर्थ - त्रयोदशी के दिन मैं यह दीपक सूर्य पुत्र यानि यमदेव को अर्पित करता हूं। वे मुझे मृत्युपाश से मुक्त करें और मेरा कल्याण करें।

3. अभ्यंग स्नान मंत्र
सीतालोष्टासमायुक्ता सकान्तकदलन्विता।
हर पापमपामार्ग भ्रम्यमानः पुनः पुनः॥

मंत्र का अर्थ - हे कांटेदार भूसी के फूल वाला पौधा, जो जुती हुई भूमि की मिट्टी, कांटों और पत्तियों से युक्त है; मेरे पापों को नष्ट कर दो.

4. नरक चतुर्दशी दीपदान मंत्र
दत्तो दीपश्चतुर्दश्याम नरकाप्रीतये मया।
चतुर्वर्तिसामायुक्तः सर्वपापनुत्तये॥

मंत्र अर्थ - इस चतुर्दशी के दिन, नर्क देवता की प्रसन्नता के लिए और सभी पापों के नाश के लिए मैं यह चार मुख वाला, चार बातियों वाला दीपक अर्पित करता हूं।

5. लक्ष्मी मंत्र
ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्म्यै नमः॥

मंत्र अर्थ - मैं धन और समृद्धि की देवी देवी लक्ष्मी को नमस्कार करता हूं।

6. बाली नमस्कार मंत्र
बलिराजा नमस्तुभ्यं दैत्यदानववंदिता।
इन्द्रशत्रोअमरते विष्णुसन्निध्यदो भव॥
बलिमुद्दिश्य दीयन्ते दानानि कुरुनन्दना।
यानि तन्यक्षान्याहुर्मयैवं सम्प्रदर्शितम्॥

मन्त्र का अर्थ - दैत्य तथा दानवों से पूजित हे बलिराज, आपको नमस्कार है। हे इन्द्रशत्रो, हे अमराराते, विष्णु के सानिध्य को देने वाला हो।
हे कुरुनन्दन, बलि को उद्देश्य कर जो दान दिये जाते हैं वे अक्षय को प्राप्त होते हैं। मैंने इस प्रकार प्रदर्शित किया है।

7. गोवर्धन मंत्र
गोवर्धन धराधर गोकुलत्राणकारक:।
बहुबाहुकृतच्छया गावं कोटिप्रदो भव॥

मंत्र का अर्थ - हे गोवर्धन, जो पृथ्वी का समर्थन करता है! आप गोकुल के रक्षक हैं. भगवान श्री कृष्ण ने आपको अपनी भुजाओं पर उठा लिया था। मुझे करोड़ों गौएँ प्रदान करें।

8. गौ मंत्र
लक्ष्मीर्य लोकापालं धेनुरूपेण संस्थिता।
घृतं वहति यज्ञार्थे मम पापं व्यपोहतु॥

मंत्र का अर्थ - हे गाय, जो स्वयं गाय के रूप में लक्ष्मी है और जो यज्ञ के लिए घी प्रदान करती है, मेरे पापों को नष्ट कर दे।

9. यम द्वितीया मंत्र
एह्येहि मार्तण्डजा पाशहस्ता यमान्तकलोकधर्मरेषा।
भ्रातृद्वितीयकृतदेवपूजं गृहाणा चार्घ्यं भगवन्नमोस्तु ते॥

मन्त्र का अर्थ - हे मार्तण्डज - सूर्य से उत्पन्न हुए, हे पाशहस्त - हाथ में पाश धारण करने वाले, हे यम, हे अन्तक, हे लोकधर, हे अमरेश, भातृद्वितीया में की हुई देवपूजा और अर्घ्य को ग्रहण करो। हे भगवन् आपको नमस्कार है।

10. मार्गपाली मंत्र
मार्गपाली नमस्तेस्तु सर्वलोकसुखप्रदे।
विधेयैः पुत्रदारद्यैः पुनरेहि व्रतस्य मे॥

मंत्र का अर्थ - हे मार्ग पर चलने वाले उत्सव, सभी जीवित प्राणियों को खुशी प्रदान करते हुए, मैं आपको प्रणाम करता हूं। मेरे संकल्पित धार्मिक अनुष्ठान (व्रत) के लिए दोबारा आना।

Deepawali Puja Mantras in English

Kshirodarnavasambhute Surasuranamaskrite। Sarvadevamaye Matargrihanarghyam Namo Namah॥
यह भी जानें

Mantra Deepawali Puja Mantras MantraDiwali MantraMata Lakshmi MantraLaxmi MantraLaxmi Pujan MantraNavratri MantraKojagari Vrat Mantra

अगर आपको यह मंत्र पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस मंत्र को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

मंत्र ›

श्री नारायण कवच

ॐ हरिर्विदध्यान्मम सर्वरक्षां न्यस्ताड़् घ्रिपद्मः पतगेन्द्रपृष्ठे । दरारिचर्मासिगदेषुचापपाशान् दधानोsष्टगुणोsष्टबाहुः ॥

श्री तुलसी स्तुति

जगद्धात्रि नमस्तुभ्यं विष्णोश्च प्रियवल्लभे । यतो ब्रह्मादयो देवाः सृष्टिस्थित्यन्तकारिणः..

शिव स्तुति: ॐ वन्दे देव उमापतिं सुरगुरुं

ॐ वन्दे देव उमापतिं सुरगुरुं, वन्दे जगत्कारणम् । वन्दे पन्नगभूषणं मृगधरं..

विष्णु सहस्रनाम: M.S.Subbulakshmi

भगवान श्री विष्णु के 1000 नाम! विष्णुसहस्रनाम का पाठ करने वाले व्यक्ति को यश, सुख, ऐश्वर्य, संपन्नता...

शिव तांडव स्तोत्रम् - मंत्र

जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले, गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम्।

शिव स्तुति, विद्येश्वरसंहिता श्रीशिवमहापुराण

आद्यन्तमङ्गलमजातसमानभाव- मार्यं तमीशमजरामरमात्मदेवम् | श्रीशिवमहापुराण / प्रथम-खण्ड - पूर्वार्ध /विद्येश्वरसंहिता / प्रथमोऽध्यायः / मुनिप्रश्नोत्तरवर्णनम्

श्री उमा महेश्वर स्तोत्रं

नमः शिवाभ्यां नवयौवनाभ्यां परस्पराश्लिष्टवपुर्धराभ्याम् । नगेन्द्रकन्यावृषकेतनाभ्यां नमो नमः शङ्करपार्वतीभ्याम् ॥

Sawan 2026 - Sawan 2026
Sawan 2026 - Sawan 2026
Bhakti Bharat APP