Shri Krishna Bhajan
गूगल पर भक्ति भारत को अपना प्रीफ़र्ड सोर्स बनाएँ

ब्रह्मन्! स्वराष्ट्र में हों, द्विज ब्रह्म तेजधारी (Brahman Swarastra Mein Hon)


ब्रह्मन्! स्वराष्ट्र में हों, द्विज ब्रह्म तेजधारी
वैदिक काल से राष्ट्र या देश के लिए गाई जाने वाली राष्ट्रोत्थान प्रार्थना है। इस काव्य को वैदिक राष्ट्रगान भी कहा जा सकता है। भक्ति भारत के अनुसार, आज भी यह प्रार्थना भारत के विभिन्न गुरुकुलों व स्कूल मे गाई जाती है। आर्य जनता इंटर कालेज, पैगू की यह प्रातः कालीन वंदना है।
यह मूल रूप से यजुर्वेद के संस्कृत श्लोक का हिन्दी रूपांतरण है।
ब्रह्मन्! स्वराष्ट्र में हों,
द्विज ब्रह्म तेजधारी ।
क्षत्रिय महारथी हों,
अरिदल विनाशकारी ॥

होवें दुधारू गौएँ,
पशु अश्व आशुवाही ।
आधार राष्ट्र की हों,
नारी सुभग सदा ही ॥

बलवान सभ्य योद्धा,
यजमान पुत्र होवें ।
इच्छानुसार वर्षें,
पर्जन्य ताप धोवें ॥

फल-फूल से लदी हों,
औषध अमोघ BhaktiBharat Lyrics सारी ।
हों योग-क्षेमकारी,
स्वाधीनता हमारी ॥

संस्कृत श्लोक:
ओ३म् आ ब्रह्मन् ब्राह्मणों ब्रह्मवर्चसी जायतामाराष्ट्रे राजन्यः शूरऽइषव्योऽतिव्याधी महारथो जायतां दोग्ध्री धेनुर्वोढ़ाऽनड्वानाशुः सप्तिः पुरन्धिर्योषा जिष्णू रथेष्ठाः सभेयो युवास्य यजमानस्य वीरो जायतां निकामे-निकामे नः पर्जन्यो वर्षतु फलवत्यो नऽओषधयः पच्यन्तां योगक्षेमो नः कल्पताम्॥
- यजुर्वेद २२, मन्त्र २२

Brahman Swarastra Mein Hon in English

Brahman! Swarashtra Mein Hon, Dwij Brahm Tejdhari । This prayer is sung in various gurukuls and schools of India. Students from Aryan Janata Inter College, Paigu sung this prayers in the morning assembly.
यह भी जानें

Bhajan Vedic BhajanVed BhajanSchool BhajanCollage BhajanMatrabhomi BhajanDesh Bhakti BhajanPatriotic BhajanAryan Janata Inter College BhajanIndependence Day BhajanRepublic Day Bhajan

अगर आपको यह भजन पसंद है, तो कृपया शेयर, लाइक या कॉमेंट जरूर करें!

Whatsapp Channelभक्ति-भारत वॉट्स्ऐप चैनल फॉलो करें »
इस भजन को भविष्य के लिए सुरक्षित / बुकमार्क करें Add To Favorites
* कृपया अपने किसी भी तरह के सुझावों अथवा विचारों को हमारे साथ अवश्य शेयर करें।

** आप अपना हर तरह का फीडबैक हमें जरूर साझा करें, तब चाहे वह सकारात्मक हो या नकारात्मक: यहाँ साझा करें

नवीनतम भजन ›

माँ शारदे कहाँ तू, वीणा बजा रही हैं - भजन

माँ शारदे कहाँ तू, वीणा बजा रही हैं, किस मंजु ज्ञान से तू...

हे सरस्वती माँ ज्ञान की देवी किरपा करो - भजन

हे सरस्वती माँ ज्ञान की देवी किरपा करो, देकर वरदान हे मात मेरा अज्ञान हरो, करुनामई है तू वरदानी कमल तेरे कर साजे है..

हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी - प्रार्थना

हे हंसवाहिनी ज्ञान दायिनी, अम्ब विमल मति दे, जग सिरमौर बनाएँ भारत, वह बल विक्रम दे

वर दे, वीणा वादिनि वर दे: सरस्वती वंदना

वर दे, वीणावादिनि वर दे । प्रिय स्वतंत्र रव, अमृत मंत्र नव, भारत में भर दे ।...

वीणा वादिनी, ज्ञान की देवी - भजन

वीणा वादिनी, ज्ञान की देवी, अपनी दया बरसा देना, मेरे सर पर हाथ धरो माँ, ज्ञान की ज्योति जगा देना..

माँ शारदे वंदना, हे शारदे माँ - भजन

हे शारदे माँ, हे शारदे माँ, अज्ञानता से हमें तार दे माँ।

सरस्वती अमृतवाणी

सुरमय वीणा धारिणी, सरस्वती कला निधान, पावन आशीष से करदे..

Durga Chalisa - Durga Chalisa
Ram Bhajan - Ram Bhajan
Bhakti Bharat APP